ABHA नंबर क्या है, और क्या आपको इसे बनाना चाहिए?
ABHA भारत की मुफ़्त डिजिटल हेल्थ आईडी है। आज ABHA क्या करता है, क्या नहीं करता, पांच मिनट में इसे कैसे बनाएं, और आपकी निजता के लिए इसका क्या मतलब है।
यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।
हो सकता है आपने किसी अस्पताल के रजिस्ट्रेशन डेस्क पर एक QR कोड देखा हो, जिसके ऊपर लिखा हो ‘अपना ABHA स्कैन करें और साझा करें’, या अपॉइंटमेंट बुक करते समय आपसे ABHA नंबर मांगा गया हो। यहां सीधे शब्दों में बताया गया है कि यह क्या है, और क्या यह आपके समय के लायक है।
संक्षेप में
ABHA का पूरा नाम आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (Ayushman Bharat Health Account) है। यह एक मुफ़्त, स्वैच्छिक, 14 अंकों की हेल्थ आईडी है, जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission) के तहत जारी की जाती है। यह मिशन भारत के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने का राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसे अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड का एक स्थायी खाता नंबर समझिए, ठीक वैसे ही जैसे टैक्स के लिए PAN आपकी पहचान बताता है।
इसे बनाने में लगभग पांच मिनट लगते हैं, कोई ख़र्च नहीं होता, और यह आधार या ड्राइविंग लाइसेंस से आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर बनता है। इसके लिए आपको किसी अस्पताल की मदद की ज़रूरत नहीं है।
तीन चीज़ें, जिनसे लोग इसे ग़लती से जोड़ देते हैं
यह स्वास्थ्य बीमा नहीं है। ABHA किसी भी चीज़ का भुगतान नहीं करता। मिलते-जुलते नाम वाली आयुष्मान भारत PM-JAY योग्य परिवारों के लिए सरकार की बीमा योजना है। उसमें अलग से नामांकन होता है, और उसका अपना अलग कार्ड होता है।
यह अनिवार्य नहीं है। ABHA न होने पर कोई भी अस्पताल या क्लिनिक आपका इलाज करने से मना नहीं कर सकता। यह आपको दिया गया एक विकल्प है।
यह कोई ऐसी जगह नहीं है जहां आपके रिकॉर्ड रखे जाते हैं। ज़्यादातर जानकारियों में यही हिस्सा ग़लत समझाया जाता है। आपकी रिपोर्ट और पर्चे उसी अस्पताल या लैब के पास रहते हैं जिसने उन्हें बनाया। ABHA वह पता है जिससे आप उन रिकॉर्ड को अपने साथ जोड़ सकते हैं, और अपनी सहमति से किसी दूसरी जगह के डॉक्टर के साथ साझा कर सकते हैं।
आज यह असल में क्या करता है
अभी दो चीज़ें सच में काम की हैं।
QR कोड से रजिस्ट्रेशन। इस व्यवस्था से जुड़े हुए किसी अस्पताल में, अपने ABHA ऐप से डेस्क का QR कोड स्कैन करने पर आपका नाम, उम्र, लिंग और ABHA नंबर रजिस्ट्रेशन काउंटर तक पहुंच जाता है। आपको फ़ॉर्म पर अपना ब्योरा दोबारा नहीं भरना पड़ता, और आपके लिए एक टोकन बन जाता है। भीड़ वाले ओपीडी (बाहरी मरीज़ विभाग) में यही सबसे साफ़ दिखने वाला फ़ायदा है।
अलग-अलग स्वास्थ्य सेवा देने वालों के रिकॉर्ड जोड़ना। जब कोई जुड़ा हुआ अस्पताल, लैब या क्लिनिक आपके लिए कोई रिकॉर्ड बनाता है, तो वह उसे आपके ABHA एड्रेस से जोड़ सकता है। बाद में कोई दूसरा डॉक्टर उन रिकॉर्ड को देखने की अनुमति मांग सकता है। आपके फ़ोन पर सहमति का अनुरोध आता है, आप चुनते हैं कि क्या साझा करना है और कितने समय के लिए, और उसके बाद ही रिकॉर्ड आगे जाता है। आप वह सहमति बाद में वापस भी ले सकते हैं।
दोनों ही मामलों में पेच ‘जुड़े हुए’ शब्द में है। हर जगह इसे एक जैसा नहीं अपनाया गया है। बड़े अस्पताल समूह, सरकारी अस्पताल और कई लैब इससे जुड़ चुके हैं। हो सकता है आपके मोहल्ले का क्लिनिक अभी न जुड़ा हो। जब वह जुड़ेगा, तब आपका ABHA तैयार होगा।
ABHA नंबर और ABHA एड्रेस
आपके सामने दो पहचान आएंगी। ABHA नंबर 14 अंकों की आईडी है। ABHA एड्रेस (पता) किसी ईमेल पते जैसा दिखता है, जैसे yourname@abdm, और असल में आप स्वास्थ्य सेवा देने वालों के साथ यही साझा करते हैं। एक नंबर के एक या एक से ज़्यादा एड्रेस हो सकते हैं। ज़्यादातर लोगों को कभी एक से ज़्यादा की ज़रूरत नहीं पड़ती।
इसे कैसे बनाएं
- आधिकारिक ABHA वेबसाइट पर जाएं, या ऐप स्टोर पर ABHA ऐप के आधिकारिक पेज से ऐप इंस्टॉल करें। उन थर्ड-पार्टी वेबसाइटों से बचें जो पैसे लेकर ‘मदद’ करने की पेशकश करती हैं।
- अपनी पहचान की पुष्टि के तरीक़े के रूप में आधार चुनें। आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा। अगर वह नंबर पुराना हो गया है, तो पहले आधार में उसे अपडेट करवाएं, या इसकी जगह ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल करें।
- अपना ब्योरा पक्का करें, एक ABHA एड्रेस चुनें, और एक पासवर्ड या PIN सेट करें।
- अपना ABHA कार्ड डाउनलोड करें या उसका स्क्रीनशॉट ले लें। रजिस्ट्रेशन डेस्क पर उसी पर बना QR कोड स्कैन किया जाता है।
अगर आप किसी बच्चे के लिए, या अपने बुज़ुर्ग माता-पिता में से किसी के लिए ABHA बना रहे हैं, तो आप यह अपने ही अकाउंट से कर सकते हैं और उसे जोड़ सकते हैं।
निजता की बात, ईमानदारी से
तीन बातें एक साथ सच हैं।
आपके रिकॉर्ड तभी साझा होते हैं जब आप किसी ख़ास अनुरोध को, किसी ख़ास मक़सद के लिए, किसी ख़ास अवधि के लिए मंज़ूरी देते हैं। सहमति का यह तरीक़ा इस व्यवस्था के डिज़ाइन का सबसे मज़बूत हिस्सा है।
अकाउंट बनाते समय आपकी पहचान की पुष्टि के लिए आधार का इस्तेमाल होता है। उसके बाद स्वास्थ्य सेवा देने वाले आपका ABHA नंबर देखते हैं, आधार नंबर नहीं, और ठीक से चलने वाली व्यवस्था आधार को जहां भी रखा जाता है, वहां उसे छिपाकर (मास्क करके) रखती है।
किसी भी डिजिटल व्यवस्था की तरह, इसकी निजता भी उतनी ही मज़बूत है जितना इससे जुड़ा सबसे कमज़ोर सेवा देने वाला। अगर यह बात आपको परेशान करती है, तो आप ABHA बनाकर भी किसी ख़ास अस्पताल में रिकॉर्ड जोड़ने से मना कर सकते हैं। आप अकाउंट को निष्क्रिय (डीएक्टिवेट) या डिलीट भी कर सकते हैं।
क्या आपको इसे बनाना चाहिए?
अगर आप या परिवार का कोई सदस्य एक से ज़्यादा अस्पतालों में डॉक्टर को दिखाता है, किसी लंबी चलने वाली बीमारी से जूझ रहा है, या सरकारी या बड़े निजी अस्पतालों में अक्सर जाता है, तो हां। यह मुफ़्त है, इसमें कुछ ही मिनट लगते हैं, और हर साल आपके और ज़्यादा रिकॉर्ड इससे जोड़े जा सकेंगे।
अगर आपका सारा इलाज एक ही छोटे क्लिनिक में होता है जो इस नेटवर्क पर नहीं है, तो इंतज़ार करने में कोई नुक़सान नहीं है, और अभी बना लेने में भी कोई नुक़सान नहीं है, ताकि जब वह क्लिनिक जुड़े तो यह तैयार रहे।
आप जो भी चुनें, अपनी रिपोर्ट और पर्चों की अपनी कॉपी ज़रूर रखें। ABHA रिकॉर्ड को जोड़ता है; उनके आपके पास होने की जगह नहीं लेता।
यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।