शोध

भारतीय स्वास्थ्य सेवा में AI: वे शोध प्रश्न जो सचमुच मायने रखते हैं

कई भाषाओं को मिलाकर होने वाली क्लिनिकल बातचीत, AI से लिखे सुरक्षित नोट, भारतीय मरीज़ों पर भी खरे उतरने वाले मॉडल, रोज़मर्रा के इलाज से मिलने वाले प्रमाण: खुले प्रश्न और अब तक की जानकारी।

यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।

स्वास्थ्य के लिए AI ज़्यादातर कहीं और बनता है और भारत में एक तैयार उत्पाद के रूप में पहुंचता है। इसमें से कुछ यहां काम करता है; कुछ नहीं करता; और इसके बड़े हिस्से को किसी ने जांचा ही नहीं है। AI भारतीय मरीज़ों की मदद करता है या नहीं, यह तय करने वाले प्रश्न शोध के प्रश्न हैं, और उनमें से कई का उत्तर अभी तक नहीं मिला है।

हमारी समझ में जो प्रश्न सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं, वे यहां हैं, साथ में यह भी कि हर एक के बारे में अब तक क्या पता है और क्या नहीं। हम इन्हीं के इर्द-गिर्द अपना शोध कार्य खड़ा कर रहे हैं, और इन्हीं समस्याओं पर काम कर रहे किसी से भी हम बात करना चाहेंगे।

1. क्या कोई मशीन भारतीय परामर्श को समझ सकती है?

भारत में डॉक्टर से परामर्श शायद ही कभी एक ही भाषा में रहता है। डॉक्टर लक्षणों के बारे में तमिल में पूछ सकते हैं, दवा का नाम अंग्रेज़ी में ले सकते हैं, और निर्देश दोनों को मिलाकर दे सकते हैं। AI स्क्राइब (AI scribe) के लिए इससे कठिन स्थिति कोई नहीं।

अब तक क्या पता है। भारतीय भाषाओं के लिए सामान्य वाक् पहचान (speech recognition) में काफ़ी सुधार हुआ है, जिसमें AI4Bharat के खुले काम ने मदद की है। उसका Vistaar बेंचमार्क सेट भारतीय भाषाओं के 59 बेंचमार्क एक साथ लाता है; इनमें से 39 पर उसके IndicWhisper मॉडलों की त्रुटि दर सबसे कम रही। उसका IndicVoices डेटासेट 145 ज़िलों के 16,000 से ज़्यादा बोलने वालों से 22 भाषाओं को समेटता है।

क्या नहीं पता। क्लिनिकल बोली पर बहुत कम अध्ययन हुआ है, और अब तक के प्रमाण विशेषज्ञ-समीक्षित (peer-reviewed) शोधपत्रों में नहीं, बल्कि प्रीप्रिंट (preprint) में हैं। कन्नड़, हिंदी और भारतीय अंग्रेज़ी में क्लिनिकल इंटरव्यू की जांच करने वाले 2025 के एक प्रीप्रिंट में पाया गया कि कुछ सिस्टम भारतीय अंग्रेज़ी पर तो अच्छा करते थे, लेकिन मिली-जुली (code-mixed) या स्थानीय भाषा की बोली पर नाकाम रहे। हिंदी-अंग्रेज़ी में होने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य परामर्शों पर 2026 के एक प्रीप्रिंट ने एक मॉडल को उस माहौल के हिसाब से ढालकर शब्द-त्रुटियों को लगभग 27% से घटाकर 19% कर दिया। तमिल-अंग्रेज़ी बोली के लिए हमें कोई प्रकाशित क्लिनिकल डेटासेट नहीं मिला।

खुले प्रश्न। मौजूदा सिस्टम मिली-जुली बोली के भीतर दवाओं के नाम, ख़ुराक और संक्षिप्त रूपों को कितनी अच्छी तरह संभालते हैं? जिस नोट को डॉक्टर जांचेंगे, उसके लिए कितनी त्रुटि दर स्वीकार्य है? मरीज़ों की सहमति से और उनकी पहचान उजागर किए बिना क्लिनिकल बोली का डेटासेट कैसे बनाया जा सकता है?

2. AI से लिखे क्लिनिकल नोट कितने सुरक्षित हैं?

जब AI किसी नोट का मसौदा बनाता है या किसी मेडिकल हिस्ट्री का सारांश तैयार करता है, तो दो तरह की ग़लतियां मायने रखती हैं: कुछ ऐसा जोड़ देना जो कहा नहीं गया था (hallucination), और कुछ ऐसा छोड़ देना जो कहा गया था (omission)।

अब तक क्या पता है। Nature Medicine में 2024 के एक अध्ययन में पाया गया कि अनुकूलित भाषा मॉडल (language models) ऐसे क्लिनिकल सारांश बना सकते थे जिन्हें डॉक्टरों ने ज़्यादातर मामलों में विशेषज्ञों के सारांशों के बराबर या उनसे बेहतर आंका, हालांकि वे ऐसी ग़लतियां भी कर रहे थे जिनसे नुक़सान हो सकता था। npj Digital Medicine में 2025 के एक अध्ययन ने, जो क्लिनिशियनों द्वारा चिह्नित लगभग 13,000 वाक्यों पर आधारित था, मनगढ़ंत बातों की दर 1.47% और छूटी हुई बातों की दर 3.45% मापी, और पाया कि दोनों में से कुछ हिस्सा गंभीर था। और Nature Medicine में 2026 के एक अध्ययन, MedHELM, ने तर्क दिया कि मेडिकल लाइसेंसिंग परीक्षा के अंक इस बारे में बहुत कम बताते हैं कि मॉडल असली क्लिनिकल कामों में कैसा प्रदर्शन करते हैं।

खुले प्रश्न। क्या मिली-जुली बातचीत से तैयार नोट में त्रुटि दर ज़्यादा होती है? भारतीय पर्चों के लिए, जहां ब्रांड नाम, दवाओं के संयोजन और ख़ुराक अलग-अलग होते हैं, कौन-सी ग़लतियां सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं? समय के दबाव में डॉक्टर की जांच असल में ग़लतियों को कितनी अच्छी तरह पकड़ पाती है, और मदद के लिए जांच वाली स्क्रीन कैसे डिज़ाइन की जानी चाहिए?

3. क्या AI स्क्राइब भारतीय क्लिनिकों में समय बचाते हैं?

अब तक क्या पता है। UCLA में 238 डॉक्टरों के साथ हुए और 2025 में NEJM AI में प्रकाशित एक रैंडमाइज़्ड ट्रायल (randomised trial) में पाया गया कि सामान्य देखभाल की तुलना में एक एंबिएंट स्क्राइब (ambient scribe) ने नोट पर लगने वाला समय 9.5% घटाया, जबकि दूसरे से कोई उल्लेखनीय फ़र्क़ नहीं पड़ा। दोनों का संबंध काम से होने वाली कम थकान (burnout) से था, और क्लिनिशियनों ने कभी-कभार क्लिनिकल रूप से अहम अशुद्धियों की बात कही। JAMA में 8,581 क्लिनिशियनों पर 2026 के एक अध्ययन में पाया गया कि स्क्राइब इस्तेमाल करने वालों ने हर आठ निर्धारित घंटों पर दस्तावेज़ीकरण में लगभग 16 मिनट कम लगाए, और इसके लेखकों ने इस असर को मामूली बताया।

क्या नहीं पता। ये अमेरिकी अध्ययन हैं, ऐसे क्लिनिकों में जहां परामर्श लंबा होता है और दस्तावेज़ीकरण का बोझ भारी होता है। एक भारतीय ओपीडी (out-patient department) में कई गुना ज़्यादा मरीज़ छोटे-छोटे परामर्शों में देखे जा सकते हैं, और अक्सर नोट कोई जूनियर डॉक्टर लिखता है। वहां स्क्राइब समय बचाता है, डॉक्टर को ज़्यादा मरीज़ देखने का मौक़ा देता है, या ख़ुद रिकॉर्ड को बेहतर बनाता है, यह मापा नहीं गया है।

खुले प्रश्न। ज़्यादा मरीज़ों वाली किसी भारतीय ओपीडी में स्क्राइब क्या बदलता है: हर मरीज़ पर लगने वाला समय, रिकॉर्ड की पूर्णता, मरीज़ की समझ? किन विशेषज्ञताओं को सबसे ज़्यादा फ़ायदा होता है?

4. क्या कोई मॉडल हमारे मरीज़ों पर काम करेगा?

अब तक क्या पता है। मॉडल अक्सर उस जगह से दूर ख़राब प्रदर्शन करते हैं जहां उन्हें बनाया गया था। इसका सबसे जाना-माना उदाहरण सेप्सिस (sepsis) का अनुमान लगाने वाला एक मॉडल है, जो अमेरिका के कई अस्पतालों में इस्तेमाल हुआ। Michigan Medicine में 38,455 अस्पताल-भर्तियों पर जांचने पर, इसने सेप्सिस के 67% मामले छोड़ दिए, जबकि सभी मरीज़ों में से 18% पर चेतावनी दी, और इसका AUC 0.63 था।

खुले प्रश्न। बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले मॉडल भारतीय मरीज़ों पर कैसा प्रदर्शन करते हैं, जिनकी बीमारियों के पैटर्न, शरीर का आकार, लैब के रेफ़रेंस रेंज और इलाज के रास्ते अलग होते हैं? बिना डेटा साइंस टीम वाला अस्पताल किसी टूल को इस्तेमाल करने से पहले कैसे परखे, और उसके बाद उस पर निगरानी कैसे रखे? जैसे-जैसे रिकॉर्ड करने की आदतें और मरीज़ों का मिश्रण बदलता है, भारतीय डेटा में “ड्रिफ़्ट” (drift) कैसा दिखता है?

5. कितना अच्छा डेटा काफ़ी माना जाए?

AI उतना ही अच्छा होता है जितने अच्छे वे रिकॉर्ड होते हैं जिन्हें वह पढ़ता है, और क्लिनिकल डेटा की गुणवत्ता को मापने का तरीक़ा शोध साहित्य में अच्छी तरह बताया गया है: पूर्णता (completeness), सटीकता (correctness), आपसी मेल (concordance), तर्कसंगतता (plausibility) और ताज़ापन (currency)। इस बारे में हमने क्लिनिकल डेटा की गुणवत्ता: AI की शुरुआत साफ़-सुथरे रिकॉर्ड से क्यों होती है में लिखा है।

खुले प्रश्न। कई जगहों पर एक ही तरीक़े से मापने पर, आज भारतीय क्लिनिकों और अस्पतालों के रिकॉर्ड कितने अच्छे हैं? डेटा दर्ज करते समय किए जाने वाले कौन-से उपाय सबसे कम मेहनत में गुणवत्ता को सबसे ज़्यादा सुधारते हैं? डेटा का इस्तेमाल करने वाले किसी भी अध्ययन या मॉडल के साथ गुणवत्ता की जानकारी कैसे दी जानी चाहिए?

6. क्या रोज़मर्रा के इलाज से भरोसेमंद प्रमाण मिल सकते हैं?

वास्तविक दुनिया के प्रमाण (real-world evidence), जो ट्रायल के बजाय रोज़मर्रा के रिकॉर्ड से लिए जाते हैं, अब दूसरे देशों में नियामक संस्थाएं और दवा कंपनियां उन प्रश्नों के उत्तर खोजने में इस्तेमाल करती हैं जिनका उत्तर ट्रायल नहीं दे सकते। भारत में इलाज बहुत बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन इसके रिकॉर्ड बिखरे हुए हैं, अक्सर काग़ज़ पर हैं, और शायद ही कभी आपस में जुड़े होते हैं।

खुले प्रश्न। कई स्वतंत्र क्लिनिकों के रिकॉर्ड को सहमति के साथ जोड़कर ऐसे डेटासेट कैसे बनाए जा सकते हैं जो कड़ी जांच में खरे उतरें? अलग-अलग स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच किसी मरीज़ को ट्रैक करने में ABHA से जुड़े रिकॉर्ड कहां तक मदद कर सकते हैं? कौन-से तरीक़े भारत के रोज़मर्रा के रिकॉर्ड की कमियों की भरपाई करते हैं?

7. ऐसा संचालन (governance) जो 50 बिस्तरों वाले अस्पताल में भी काम करे

अब तक क्या पता है। सिद्धांतों की कोई कमी नहीं है। ICMR ने 2023 में जैव-चिकित्सा शोध और स्वास्थ्य सेवा में AI के लिए नैतिक दिशानिर्देश प्रकाशित किए। WHO का 2021 का मार्गदर्शन छह सिद्धांत तय करता है। NITI Aayog के Responsible AI दस्तावेज़ भारत के लिए सात सिद्धांत तय करते हैं। ISO/IEC 42001:2023 AI के लिए एक प्रबंधन प्रणाली परिभाषित करता है।

खुला प्रश्न। इनमें से ज़्यादातर यह मानकर चलते हैं कि संगठन में संचालन का एक अलग दफ़्तर है। तौर-तरीक़ों का वह सबसे छोटा समूह क्या है जिससे कोई छोटा अस्पताल या अकेले डॉक्टर वाला क्लिनिक AI को सुरक्षित रूप से इस्तेमाल कर सके, और सॉफ़्टवेयर इन तौर-तरीक़ों को अतिरिक्त काम के बजाय सामान्य व्यवस्था (default) कैसे बना सकता है?

हम इन प्रश्नों पर कैसे काम करते हैं

92health वे EMR और AI टूल बनाता है जिन्हें भारतीय क्लिनिक और अस्पताल रोज़ इस्तेमाल करते हैं, और इसी वजह से हम इन प्रश्नों के क़रीब हैं। हम इन्हीं के इर्द-गिर्द अपना शोध कार्य खड़ा कर रहे हैं, और हम इसे खुले तौर पर करना चाहते हैं: क्लिनिशियनों और अकादमिक समूहों के साथ, मरीज़ों की सहमति से, जहां ज़रूरी हो वहां एथिक्स कमेटी (ethics committee) की निगरानी में, और नतीजों को प्रकाशित करते हुए।

अगर आप इनमें से किसी प्रश्न पर काम कर रहे हैं, या करना चाहते हैं, तो हमारी टीम के साथ कॉल बुक करें।

स्रोत

  • Bhogale KS et al. Vistaar: diverse benchmarks and training sets for Indian language ASR. Interspeech 2023. arXiv:2305.15386
  • IndicVoices (AI4Bharat). arXiv:2403.01926, 2024.
  • ASR under the stethoscope (प्रीप्रिंट). arXiv:2512.10967, 2025.
  • DASHA (प्रीप्रिंट). arXiv:2603.06373, 2026.
  • Van Veen D et al. Adapted large language models can outperform medical experts in clinical text summarization. Nature Medicine, 2024;30:1134-1142. doi:10.1038/s41591-024-02855-5
  • Asgari E et al. A framework to assess clinical safety and hallucination rates of LLMs for medical text summarisation. npj Digital Medicine, 2025;8:274. doi:10.1038/s41746-025-01670-7
  • Bedi S et al. Holistic evaluation of large language models for medical tasks with MedHELM. Nature Medicine, 2026;32:943-951.
  • Lukac PJ et al. Ambient AI scribes in clinical practice: a randomized trial. NEJM AI, 2025. doi:10.1056/AIoa2501000
  • Rotenstein LS et al. JAMA, 2026;335(16):1408-1417.
  • Wong A et al. External validation of a widely implemented proprietary sepsis prediction model in hospitalized patients. JAMA Internal Medicine, 2021. doi:10.1001/jamainternmed.2021.2626
  • WHO. Ethics and governance of artificial intelligence for health, 2021.

आम सवाल

भारतीय स्वास्थ्य सेवा में AI से जुड़े शोध की मुख्य कमियां क्या हैं?
ऐसे परामर्शों के लिए वाक् पहचान (speech recognition) जिनमें अंग्रेज़ी और भारतीय भाषाएं मिली-जुली होती हैं; यह मापना कि AI से लिखे क्लिनिकल नोट कितने सुरक्षित हैं; यह जांचना कि मॉडल भारतीय मरीज़ों पर और भारतीय कामकाज के तरीक़ों में ठीक काम करते हैं या नहीं; उस डेटा की गुणवत्ता जिससे AI सीखता है; और हर आकार के अस्पताल में AI का संचालन (governance) कैसे हो।
क्या भारतीय डॉक्टरी परामर्शों के लिए वाक् पहचान काम करती है?
AI4Bharat के Vistaar जैसे खुले बेंचमार्कों की मदद से भारतीय भाषाओं के लिए सामान्य वाक् पहचान में काफ़ी सुधार हुआ है। अंग्रेज़ी और किसी भारतीय भाषा के बीच बदलती रहने वाली क्लिनिकल बोली पर बहुत कम अध्ययन हुआ है, और शुरुआती प्रीप्रिंट (preprint) दिखाते हैं कि भारतीय अंग्रेज़ी पर अच्छा करने वाले सिस्टम मिली-जुली (code-mixed) बोली पर लड़खड़ा जाते हैं।
AI टूल क्लिनिकल नोट में कितनी बार ग़लतियां करते हैं?
यह टूल और काम पर निर्भर करता है। क्लिनिकल सारांशों पर 2025 के एक अध्ययन में 1.47% वाक्यों में मनगढ़ंत बातें (hallucination) और 3.45% वाक्यों में छूटी हुई बातें (omission) मिलीं, और दोनों में से कुछ हिस्से को गंभीर आंका गया। इसीलिए ज़रूरी है कि AI के हर मसौदे को कोई क्लिनिशियन जांचे और उस पर हस्ताक्षर करे।
क्या AI स्क्राइब डॉक्टरों का समय बचाते हैं?
कुछ हद तक। 2025 के एक रैंडमाइज़्ड ट्रायल (randomised trial) में एक स्क्राइब से नोट लिखने का समय 9.5% घटा और दूसरे से कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ। 8,581 क्लिनिशियनों पर 2026 के एक अध्ययन में हर आठ निर्धारित घंटों पर दस्तावेज़ीकरण में लगभग 16 मिनट कम लगे। भारत में ओपीडी में आने वाले मरीज़ों की संख्या बहुत अलग है, इसलिए यहां इसका अध्ययन ज़रूरी है।
क्या विदेश में प्रशिक्षित AI मॉडल को भारतीय मरीज़ों पर इस्तेमाल किया जा सकता है?
तभी, जब उसे भारतीय मरीज़ों पर परखा जा चुका हो। मॉडल अक्सर नई आबादी और नए अस्पतालों में उस जगह के मुक़ाबले ख़राब काम करते हैं जहां उन्हें बनाया गया था, इसलिए स्थानीय स्तर पर जांच (validation), और इस्तेमाल शुरू होने के बाद निगरानी, बेहद ज़रूरी है।

यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।