नाक, कान, गला

सुनने की जांच की रिपोर्ट कैसे पढ़ें: आपका ऑडियोग्राम और टिम्पैनोग्राम, आसान भाषा में

ऑडियोग्राम पर बने X, O और रेखाओं का क्या मतलब है, सुनने की कमी को श्रेणियों में कैसे बांटा जाता है, A, B या C टाइप का टिम्पैनोग्राम क्या बताता है, और अपने ईएनटी डॉक्टर से क्या पूछें।

यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।

सुनने की जांच (hearing test) के बाद आपको एक काग़ज़ मिलता है जो किसी अधूरे छोड़ दिए गए ग्राफ़ जैसा दिखता है: X और O से बनी दो रेखाएं, कुछ ब्रैकेट, एक डिब्बे में एक घुमावदार रेखा, और सबसे नीचे संक्षिप्त शब्दों की एक पंक्ति। ईएनटी डॉक्टर इसे कुछ ही सेकंड में पढ़ लेते हैं। ज़्यादातर मरीज़ इसे मोड़कर फ़ाइल में रख देते हैं और फिर कभी नहीं देखते।

इसे देखना फ़ायदेमंद है। ऑडियोग्राम (audiogram) उन गिनी-चुनी मेडिकल रिपोर्टों में से है जिन्हें पढ़ना आप दस मिनट में सीख सकते हैं, और एक बार सीख लिया तो आप समझ पाएंगे कि डॉक्टर आपको क्या बता रहे हैं, सुनने की मशीन (hearing aid) की सलाह क्यों दी गई या क्यों नहीं दी गई, और अगले साल किस चीज़ से तुलना करनी है। यह लेख भारत में मिलने वाली सुनने की जांच की एक आम रिपोर्ट के हिस्सों को एक-एक करके समझाता है। यह आपकी अपनी रिपोर्ट को आपके ईएनटी डॉक्टर द्वारा पढ़े जाने की जगह नहीं ले सकता।

सुनने की जांच में आम तौर पर क्या-क्या होता है

ईएनटी क्लिनिक या ऑडियोलॉजी सेंटर पर होने वाली “सुनने की जांच” आम तौर पर कई जांचों का एक सेट होती है, जो एक साथ प्रिंट होती हैं:

  • प्योर-टोन ऑडियोमेट्री (pure-tone audiometry)। आप हेडफ़ोन लगाकर एक शांत बूथ में बैठते हैं और हर बार बीप सुनाई देने पर एक बटन दबाते हैं। इसी से ऑडियोग्राम बनता है, वह ग्राफ़ जिसके बारे में यह लेख ज़्यादातर बात करता है।
  • हड्डी से सुनने की जांच (bone conduction)। कान के पीछे की हड्डी पर एक छोटा कंपन करने वाला उपकरण रखा जाता है और बीप दोबारा बजाई जाती हैं। इसकी तुलना हेडफ़ोन वाले नतीजों से करके डॉक्टर समझ पाते हैं कि सुनने की समस्या कहां है।
  • टिम्पैनोमेट्री (tympanometry)। कान की नली में रखा गया एक मुलायम प्रोब हवा का दबाव थोड़ा बदलता है और मापता है कि कान का पर्दा कैसे हिलता है। यह एक छोटी घुमावदार रेखा के रूप में प्रिंट होता है, आम तौर पर उसी रिपोर्ट पर।
  • बोली की जांच (speech tests)। कभी-कभी आपसे अलग-अलग आवाज़ पर बजाए गए शब्दों को दोहराने के लिए कहा जाता है।

आपके डॉक्टर कंसल्टिंग रूम में ही ट्यूनिंग फ़ोर्क (tuning fork) से एक छोटी जांच भी कर सकते हैं। नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की जांच दूसरे टेस्ट से की जाती है, जिनकी बात यहां नहीं की गई है।

ऑडियोग्राम कैसे पढ़ें

दो अक्ष

ऑडियोग्राम एक ग्रिड है।

  • ऊपर, बाएं से दाएं, सुर (pitch) होता है, जिसे हर्ट्ज़ (Hz) में मापा जाता है। यह आम तौर पर 250 Hz, यानी नीचे सुर की एक गूंज, से शुरू होकर 8,000 Hz, यानी ऊंचे सुर की एक सीटी, तक जाता है। बोली को साफ़ बनाने वाली ज़्यादातर आवाज़ें, जैसे “s”, “f” और “th”, ऊंचे सुर वाले हिस्से में होती हैं।
  • किनारे पर, ऊपर से नीचे, आवाज़ की तेज़ी (loudness) होती है, जिसे सुनने के स्तर के डेसिबल (decibel, dB HL) में मापा जाता है। यही हिस्सा लोगों को उलझाता है: धीमी आवाज़ ऊपर होती है और तेज़ आवाज़ नीचे। हर निशान दिखाता है कि उस सुर पर आप सबसे धीमी कौन सी बीप सुन पाए। चार्ट पर कोई निशान जितना नीचे होता है, आपको सुनाई देने से पहले आवाज़ उतनी ही तेज़ करनी पड़ी।

इसलिए जो रेखा ग्रिड के ऊपरी हिस्से में आर-पार चलती है, वह अच्छी सुनने की क्षमता है। जो रेखा नीचे की ओर धंसती जाती है, वह सुनने की कमी (hearing loss) है।

निशान

भारत में ज़्यादातर रिपोर्टें आम चलन वाले तरीके का पालन करती हैं:

निशान कान जांच
O (अक्सर लाल) दायां हेडफ़ोन से (एयर कंडक्शन)
X (अक्सर नीला) बायां हेडफ़ोन से (एयर कंडक्शन)
< या [ दायां हड्डी से (बोन कंडक्शन)
> या ] बायां हड्डी से (बोन कंडक्शन)

अगर किसी निशान से नीचे की ओर एक तीर लटका हो, तो इसका मतलब है कि मशीन जितनी तेज़ आवाज़ बजा सकती थी, उस पर भी आपको बीप सुनाई नहीं दी। अलग-अलग मशीनों में यह तरीका अलग हो सकता है, इसलिए अपनी रिपोर्ट पर छपी कुंजी (key) देख लें।

सुनने की कमी को श्रेणियों में कैसे बांटा जाता है

हर कान के लिए एक संख्या देने के लिए, बोली के मुख्य सुरों पर मिली बीप के नतीजों का औसत निकाला जाता है। इसे प्योर-टोन एवरेज (pure-tone average), या PTA, कहते हैं। भारत में कई रिपोर्टें तीन सुरों (500, 1,000 और 2,000 Hz) का औसत लेती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की श्रेणियां 4,000 Hz को जोड़कर चार सुरों का औसत लेती हैं, इसलिए एक ही कान के लिए दोनों तरीकों में कुछ डेसिबल का फ़र्क आ सकता है।

बेहतर सुनने वाले कान के औसत के आधार पर WHO की श्रेणियां:

श्रेणी औसत थ्रेशोल्ड
सामान्य सुनने की क्षमता 20 dB से बेहतर
हल्की (Mild) 20 से लेकर 35 dB से कम
मध्यम (Moderate) 35 से लेकर 50 dB से कम
मध्यम से गंभीर (Moderately severe) 50 से लेकर 65 dB से कम
गंभीर (Severe) 65 से लेकर 80 dB से कम
बहुत गंभीर (Profound) 80 से लेकर 95 dB से कम
पूरी तरह (Complete) 95 dB या उससे ख़राब

श्रेणी सिर्फ़ शुरुआत है, पूरी कहानी नहीं। एक जैसे औसत वाले दो लोगों को बहुत अलग-अलग तरह की दिक्कत हो सकती है, यह इस पर निर्भर करता है कि कौन से सुर प्रभावित हैं और दिमाग़ पीछे के शोर से बोली को कितनी अच्छी तरह अलग कर पाता है।

समस्या कहां है: चालन संबंधी, संवेदी-तंत्रिका संबंधी या मिश्रित

यहीं हड्डी वाली जांच के ब्रैकेट अपना काम दिखाते हैं।

  • चालन संबंधी सुनने की कमी (conductive hearing loss)। हड्डी वाली जांच के नतीजे लगभग सामान्य होते हैं, लेकिन हेडफ़ोन वाले नतीजे ख़राब होते हैं। दोनों के बीच के अंतर को एयर-बोन गैप (air-bone gap) कहते हैं। आवाज़ अंदर जाते हुए रास्ते में, कान की नली या मध्य कान में, रुक रही है: कान का मैल, कान के पर्दे के पीछे तरल पदार्थ, पर्दे में छेद (perforation), या मध्य कान की छोटी हड्डियों में कोई समस्या। इनमें से कई का इलाज हो सकता है।
  • संवेदी-तंत्रिका संबंधी सुनने की कमी (sensorineural hearing loss)। दोनों रेखाएं साथ-साथ होती हैं, और दोनों नीचे होती हैं। समस्या अंदरूनी कान या सुनने की नस में है। उम्र के साथ होने वाली सुनने की कमी और शोर से हुआ नुकसान इसके सबसे आम कारण हैं। आम तौर पर सुनने की मशीन से इसी तरह की कमी में मदद मिलती है।
  • मिश्रित सुनने की कमी (mixed hearing loss)। दोनों रेखाएं नीचे होती हैं, और उनके बीच अंतर भी होता है।

जानने लायक आकार

कुछ पैटर्न इतनी बार दिखते हैं कि उन्हें पहचानना काम आता है:

  • दाईं ओर नीचे झुकती रेखा। नीचे सुरों पर सुनना बेहतर और ऊंचे सुरों पर ख़राब होता है। उम्र के साथ होने वाली सुनने की कमी का यह आम आकार है। ऐसे लोग अक्सर कहते हैं कि उन्हें यह तो सुनाई देता है कि कोई बोल रहा है, पर शब्द समझ नहीं आते।
  • 4,000 Hz के आसपास एक गड्ढा, जो 8,000 Hz पर फिर ऊपर आ जाता है। इसे अक्सर नॉइज़ नॉच (noise notch) कहा जाता है। यह आम तौर पर सालों तक तेज़ शोर के बाद दिखता है, चाहे वह काम की जगह पर हो, ईयरफ़ोन से संगीत सुनने से हो, या पटाखों से।
  • एक कान दूसरे से बहुत ज़्यादा ख़राब। अगर दोनों कानों में सुनना बराबर न हो और उसकी कोई साफ़ वजह, जैसे कान का मैल या कान का संक्रमण, न हो, तो आम तौर पर आगे जांच की जाती है। आपके डॉक्टर और टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।

टिम्पैनोग्राम कैसे पढ़ें

टिम्पैनोग्राम (tympanogram) वह छोटी घुमावदार रेखा है, जिसके पास आम तौर पर एक अक्षर लिखा होता है। यह बताता है कि कान का पर्दा कितनी आसानी से हिलता है।

  • टाइप A: सामान्य चोटी। मध्य कान जैसे हिलना चाहिए, वैसे हिल रहा है।
  • टाइप As या Ad: एक चोटी जो असामान्य रूप से छोटी या असामान्य रूप से ऊंची हो। ये बताती हैं कि मध्य कान सामान्य से ज़्यादा सख़्त या ढीला है, और इन्हें ऑडियोग्राम के साथ मिलाकर पढ़ा जाता है।
  • टाइप B: सपाट, कोई चोटी नहीं। यह आम तौर पर तब दिखता है जब कान के पर्दे के पीछे तरल हो, जो सर्दी-ज़ुकाम के बाद बच्चों में अक्सर पाया जाता है। अगर सपाट रेखा के साथ कान की नली का आयतन ज़्यादा हो, तो इसका मतलब कान के पर्दे में छेद हो सकता है, या कोई ग्रोमेट (grommet) जो खुला है।
  • टाइप C: बाईं ओर, यानी नकारात्मक दबाव की ओर खिसकी हुई चोटी। मध्य कान को नाक के पिछले हिस्से से जोड़ने वाली नली (यूस्टेकियन ट्यूब, Eustachian tube) दबाव को ठीक से बराबर नहीं कर रही है, जैसा अक्सर सर्दी-ज़ुकाम या एलर्जी में होता है।

अपने ईएनटी डॉक्टर से क्या पूछें

  • मेरी सुनने की कमी चालन संबंधी है, संवेदी-तंत्रिका संबंधी है या मिश्रित, और किस कान में?
  • हर कान में श्रेणी क्या है, और कौन से सुर सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
  • क्या इसका इलाज हो सकता है, या इसे संभालते हुए चलना होगा?
  • क्या सुनने की मशीन से मुझे मदद मिलेगी, और किस कान में?
  • जांच दोबारा कब करवानी चाहिए, और क्या अगली बार यह रिपोर्ट साथ लानी चाहिए?

यह आख़िरी सवाल जितना लगता है उससे ज़्यादा अहम है। सुनने की क्षमता पर सालों तक नज़र रखी जाती है, और नया ऑडियोग्राम तभी सबसे ज़्यादा मायने रखता है जब वह पिछले ऑडियोग्राम के साथ रखा जाए। काग़ज़ संभालकर रखें, या इससे भी बेहतर, इसकी एक कॉपी ऐसी जगह रखें जहां वह तीन साल बाद भी आपके पास हो। फ़ोन पर रखा गया हेल्थ रिकॉर्ड, जैसे आपका 92health रिकॉर्ड, आपको हर रिपोर्ट अगले क्लिनिक तक ले जाने देता है, और उसे तभी शेयर करने देता है जब आप चाहें।

कब इंतज़ार न करें

अगर आपको इनमें से कुछ हो, तो अगली नियमित विज़िट का इंतज़ार न करें, एक-दो दिन के अंदर ईएनटी डॉक्टर को दिखाएं:

  • एक कान में अचानक सुनाई कम हो जाना, कुछ घंटों में या एक-दो दिन में। इलाज जल्दी शुरू होने पर सबसे अच्छा काम करता है।
  • सुनने की कमी के साथ चक्कर आना या सब कुछ घूमता हुआ लगना।
  • कान बहने और बुखार के साथ कान में दर्द।
  • सिर्फ़ एक कान में घंटी जैसी आवाज़, जो गई न हो।

सालों में धीरे-धीरे बढ़ने वाली सुनने की कमी आम है और आम तौर पर संभाली जा सकती है। रात भर में आई सुनने की कमी अलग बात है, और उसके लिए उसी दिन फ़ोन करना ठीक रहता है।

आम सवाल

सुनने की जांच का सामान्य नतीजा क्या होता है?
प्योर-टोन ऑडियोग्राम पर, अगर जांचे गए सभी सुरों पर थ्रेशोल्ड 20 dB HL से बेहतर हों, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की श्रेणियों के अनुसार इसे सामान्य सुनने की क्षमता माना जाता है। आपकी रिपोर्ट में थोड़ी अलग सीमा इस्तेमाल हो सकती है, और ऑडियोलॉजिस्ट की लिखी सारांश वाली पंक्ति बताती है कि कौन सी।
ऑडियोग्राम पर एयर-बोन गैप (air-bone gap) का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि कान के पीछे की हड्डी से सुनाई देने वाली आवाज़, कान की नली से सुनाई देने वाली आवाज़ से ज़्यादा साफ़ है। लगभग 10 से 15 dB से ज़्यादा का अंतर आम तौर पर अंदरूनी कान की नहीं, बल्कि बाहरी या मध्य कान की किसी समस्या की ओर इशारा करता है, जैसे कान का मैल, तरल पदार्थ, या कान के पर्दे की कोई समस्या।
टाइप B टिम्पैनोग्राम क्या है?
एक सपाट रेखा: कान की नली में दबाव बदलने पर भी कान का पर्दा नहीं हिल रहा। यह आम तौर पर कान के पर्दे के पीछे तरल होने पर दिखता है। कान की नली के आयतन (ear canal volume) के साथ मिलाकर पढ़ने पर, सपाट रेखा कान के पर्दे में छेद या बंद नली की ओर भी इशारा कर सकती है।
क्या अचानक सुनाई कम होना इमरजेंसी है?
हां। अगर एक कान में कुछ घंटों में या एक-दो दिन में सुनाई कम हो जाए, तो एक-दो दिन के अंदर ईएनटी डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है। इलाज जल्दी शुरू होने पर सबसे अच्छा काम करता है, इसलिए यह देखने का इंतज़ार न करें कि अपने आप ठीक होता है या नहीं।
सुनने की जांच कितने समय बाद दोबारा करवानी चाहिए?
यह इस पर निर्भर करता है कि जांच क्यों की गई थी। जिन लोगों में सुनने की कमी पहले से पता है, जो सुनने की मशीन इस्तेमाल करते हैं, और जो तेज़ शोर के बीच काम करते हैं, उनकी आम तौर पर हर साल दोबारा जांच होती है, या उतनी बार जितनी बार उनके ईएनटी डॉक्टर सलाह दें।

यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।