त्वचा रोग

त्वचा रोग क्लिनिक में मरीज़ों की तस्वीरें: सहमति, एक जैसा तरीका और सुरक्षित रखना

क्लिनिकल तस्वीरें किसी स्किन क्लिनिक का सबसे काम का रिकॉर्ड भी हैं और सबसे जोखिम वाला भी। सहमति कैसे लें, ऐसी तस्वीरें कैसे लें जिनकी तुलना हो सके, और उन्हें स्टाफ़ के फ़ोन से दूर कैसे रखें।

यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।

ज़्यादातर स्पेशियलिटी में रिकॉर्ड शब्दों में होता है: बीमारी का इतिहास, जांच, निदान। डर्मेटोलॉजी (त्वचा रोग विज्ञान) में सबसे काम का रिकॉर्ड अक्सर एक तस्वीर होती है। मुंहासे कम हो रहे हैं या नहीं, सफ़ेद दाग (विटिलिगो) के धब्बे में रंग लौट रहा है या नहीं, झाइयां (मेलास्मा) हल्की पड़ रही हैं या नहीं, या सोरायसिस का चकत्ता पतला हुआ है या नहीं, यह अगल-बगल रखी दो तस्वीरों से कहीं आसानी से समझ आता है, बजाय ऐसे दो नोट्स के जिनमें दोनों में बस “सुधार हो रहा है” लिखा हो।

यही तस्वीरें किसी स्किन क्लिनिक में रखी जाने वाली सबसे संवेदनशील चीज़ भी हैं। इनमें चेहरे, शरीर और कभी-कभी निजी अंग दिखते हैं, और ज़्यादातर क्लिनिकों में ये पास में जो भी फ़ोन हो उसी से ले ली जाती हैं। यह लेख तीन बातों के बारे में है: सहमति, ऐसी तस्वीरें लेना जिनकी सच में तुलना हो सके, और तस्वीरें कहां रखी जानी चाहिए। यह त्वचा रोग विशेषज्ञों (डर्मेटोलॉजिस्ट) और क्लिनिक मैनेजरों के लिए लिखा गया है।

तस्वीरें फ़ोन में क्यों पहुंच जाती हैं, और यही समस्या क्यों है

फ़ोन हमेशा हाथ के पास होता है, कैमरा अच्छा होता है, और WhatsApp पर डॉक्टर को तस्वीर भेजने में कुछ ही सेकंड लगते हैं। इसलिए तस्वीरें स्टाफ़ के किसी सदस्य के फ़ोन पर ली जाती हैं, किसी चैट ग्रुप में शेयर होती हैं, और शायद बाद में प्रिंट कर ली जाती हैं या फ़ाइल में लगा दी जाती हैं।

ये समस्याएं तब तक चुपचाप रहती हैं, जब तक सामने नहीं आ जातीं:

  • तस्वीर परिवार की तस्वीरों के बगल में एक निजी गैलरी में पड़ी रहती है, और उस व्यक्ति के निजी क्लाउड अकाउंट में उसका बैकअप हो जाता है।
  • वह विज़िट से जुड़ी नहीं होती। छह महीने बाद कोई पक्के तौर पर नहीं बता सकता कि वह किस विज़िट की है, किस तरफ़ की है या किस इलाज से जुड़ी है।
  • जब स्टाफ़ का वह सदस्य नौकरी छोड़ता है, तो तस्वीरें भी उसके साथ चली जाती हैं।
  • फ़ोन खोया, तो मरीज़ों की तस्वीरों का एक पूरा सेट भी खो गया।
  • विज़िट की तुलना करने के लिए किसी गैलरी या चैट हिस्ट्री में स्क्रॉल करते रहना पड़ता है।

इसमें किसी की बुरी नीयत की ज़रूरत नहीं है। जब सुविधाजनक औज़ार क्लिनिक का अपना औज़ार न हो, तो बस यही होता है।

सहमति: दो तरह की, और दोनों दर्ज की हुई

क्लिनिकल तस्वीर के दो अलग-अलग इस्तेमाल होते हैं, और हर एक के लिए अपनी अलग सहमति चाहिए।

मेडिकल रिकॉर्ड के लिए। किसी बीमारी की स्थिति को दर्ज करने और समय के साथ उस पर नज़र रखने के लिए ली गई तस्वीरें इलाज का हिस्सा हैं। बताएं कि किस चीज़ की तस्वीर ली जाएगी और क्यों, और दर्ज करें कि मरीज़ ने हामी भरी, साथ में तारीख और यह भी कि तस्वीरें किसने लीं।

बाकी किसी भी काम के लिए। पढ़ाना, कॉन्फ़्रेंस में दिए जाने वाले व्याख्यान, प्रकाशन, क्लिनिक की वेबसाइट और सोशल मीडिया, ये सब अलग-अलग इस्तेमाल हैं। हर एक के लिए अलग, साफ़-साफ़ सहमति चाहिए, जो यह ठीक-ठीक जानते हुए दी गई हो कि तस्वीर कहां दिखेगी। रिकॉर्ड के लिए ली गई तस्वीर को दोबारा पूछे बिना कभी मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

भारत का Digital Personal Data Protection Act, 2023 (डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम) दोनों पर लागू होता है। मरीज़ की तस्वीर निजी डेटा है। यह कानून अपेक्षा करता है कि सहमति अपनी मर्ज़ी से, किसी खास मकसद के लिए, पूरी जानकारी के साथ, बिना किसी शर्त के और बिना किसी शक की गुंजाइश के दी जाए, और वह किसी साफ़ सकारात्मक क़दम (clear affirmative action) के ज़रिए दी जाए। यह कानून व्यक्ति को सहमति वापस लेने की इजाज़त भी देता है, जिसके बाद उस मकसद के लिए वह डेटा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए सहमति माता-पिता या कानूनी अभिभावक से आती है।

व्यवहार में इसका मतलब है:

  • एक छोटा, सरल सहमति फ़ॉर्म, जिसमें क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए और हर उस दूसरे इस्तेमाल के लिए अलग-अलग टिक बॉक्स हों जो आप चाह सकते हैं;
  • सहमति किसी अलग कागज़ पर नहीं, बल्कि मरीज़ की फ़ाइल में दर्ज हो;
  • सहमति वापस लेने को दर्ज करने का एक तरीका, और किसी तस्वीर को क्लिनिक के बाहर इस्तेमाल करने से पहले सहमति जांचने की आदत;
  • निजी अंगों के लिए एक चैपरोन (साथ में मौजूद व्यक्ति), और तस्वीरें सिर्फ़ क्लिनिक के उपकरण पर ली जाएं।

ऐसी तस्वीरें लेना जिनकी तुलना हो सके

कोई तस्वीर रिकॉर्ड के तौर पर तभी काम की है, जब अगली तस्वीर की उससे तुलना की जा सके। मरीज़ और डॉक्टर के बीच “पहले से बेहतर दिख रहा है” वाली ज़्यादातर असहमतियां अलग-अलग रोशनी में, अलग-अलग दूरी से ली गई तस्वीरों की वजह से होती हैं।

एक आसान प्रोटोकॉल तय करें और उसे कैमरे के पास रखें:

  1. वही जगह, वही रोशनी। क्लिनिक में एक तय जगह, जहां रोशनी फैली हुई (diffuse) हो और मरीज़ के पीछे खिड़की न हो। क्लोज़-अप के लिए फ़्लैश से बचें, क्योंकि उसमें लालिमा और रंगत (पिगमेंट) फीकी पड़ जाती है।
  2. सादा बैकग्राउंड। मैट (बिना चमक वाली), हल्के न्यूट्रल रंग की दीवार या चादर, कोई डिज़ाइन नहीं।
  3. स्टैंडर्ड व्यू। चेहरे के लिए: सामने से, 45 डिग्री पर बाएं और दाएं से, और दोनों प्रोफ़ाइल (बगल से)। शरीर के लिए: हर हिस्से के लिए तय किए गए व्यू, हर विज़िट में वही।
  4. वही दूरी। फ़र्श पर निशान लगा दें, या इसी काम के लिए रखे गए उपकरण पर एक तय सेटिंग इस्तेमाल करें।
  5. माप और रंग। क्लोज़-अप के लिए फ़्रेम में एक छोटा रूलर या कलर कार्ड रखें, ताकि अलग-अलग विज़िट में आकार और रंग का अंदाज़ा लगाया जा सके।
  6. जगह का लेबल लगाएं। हर तस्वीर के साथ शरीर का हिस्सा और तरफ़ दर्ज करें। “बायां गाल” एक रिकॉर्ड है; “गाल” एक अंदाज़ा।
  7. डर्मोस्कोपी अलग से। डर्मोस्कोपी की तस्वीरें अपनी अलग सीरीज़ हैं, और उन्हें उसी लीज़न (lesion) के साथ सहेजा जाना चाहिए जिसे वे दिखाती हैं।

तस्वीरें कहां रखी जानी चाहिए

तस्वीर वहीं पहुंचनी चाहिए जहां बाकी रिकॉर्ड है: मरीज़ की फ़ाइल में, विज़िट और शरीर के हिस्से के साथ जुड़ी हुई, ताकि अगली विज़िट में डॉक्टर को बिना खोजे दिख जाए।

अपने क्लिनिक सॉफ़्टवेयर से इन बातों की उम्मीद रखें:

  • तस्वीरें सीधे मरीज़ के रिकॉर्ड में अपलोड हों और विज़िट के साथ सहेजी जाएं;
  • स्टाफ़ की भूमिका (रोल) के हिसाब से सीमित पहुंच, ताकि तस्वीर वही लोग देखें जो मरीज़ का इलाज कर रहे हैं, न कि हर वह व्यक्ति जिसके पास लॉगिन है;
  • अलग-अलग विज़िट की तस्वीरें, जिन्हें आसानी से अगल-बगल रखकर देखा जा सके;
  • तस्वीरों के साथ ही एक सहमति रिकॉर्ड;
  • अपलोड होने के बाद तस्वीरें डिवाइस से हटा दी जाएं।

अगर आज आपके क्लिनिक में स्टाफ़ के फ़ोन पर तस्वीरें ली जाती हैं, तो सबसे बड़ा एक सुधार यह नियम है कि तस्वीरें उसी दिन रिकॉर्ड में अपलोड की जाएं और फिर फ़ोन से डिलीट कर दी जाएं। सॉफ़्टवेयर को इसी को सबसे आसान रास्ता बनाना चाहिए।

इसमें 92health की भूमिका

92health एक EMR है, जिसे भारत में क्लिनिक, अस्पताल, फ़ार्मेसी, लैब और चश्मे की दुकानें इस्तेमाल करती हैं। इसका डर्मेटोलॉजी वर्कस्पेस ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखकर बनाया गया है:

  • आगे और पीछे का बॉडी मैप: मैप पर एक क्लिक से शरीर का हिस्सा और तरफ़ दर्ज हो जाते हैं।
  • एक लीज़न रजिस्टर, जो विज़िट का नहीं, मरीज़ का होता है, ताकि हर लीज़न का अपना इतिहास रहे, और इस विज़िट का अवलोकन पिछली बार वाले अवलोकन के बगल में दिखे।
  • विज़िट के साथ अपलोड की गई क्लिनिकल तस्वीरें, जो सिर्फ़ साइन-इन किए हुए स्टाफ़ को ही स्ट्रीम की जाती हैं।
  • PASI और DLQI स्कोर, जो आपके ग्रिड भरते-भरते उन्हीं से गिन लिए जाते हैं।
  • निदान, बीमारी का इतिहास और डॉक्टर का नोट, जो विज़िट समरी पर प्रिंट होते हैं।

इसके आसपास, क्लिनिक का बाकी काम:

  • मरीज़ के दस्तावेज़, जो मरीज़ के रिकॉर्ड में अपलोड होकर विज़िट के साथ सहेजे जाते हैं, और आपके तय किए गए स्टाफ़ रोल के हिसाब से दिखते हैं।
  • रजिस्ट्रेशन और OPD कतार, जिसमें QR से खुद चेक-इन भी शामिल है, जहां मरीज़ अपने ही फ़ोन पर रजिस्टर करते हैं और डेस्क तक पहुंचने से पहले अपने दस्तावेज़ अपलोड कर देते हैं।
  • ई-प्रिस्क्रिप्शन, जो आपके क्लिनिक के अपने फ़ार्मेसी काउंटर तक पहुंचते हैं, और काउंटर पर ही बैच के हिसाब से स्टॉक और बिलिंग।
  • आपके अपने सर्विस कैटलॉग से प्रोसीजर और पैकेज, जैसे पील्स का एक कोर्स या लेज़र सेशन, जिनका बिल एक ही पैकेज के रूप में बनता है।
  • बिलिंग और पेमेंट वसूली, जिसमें पेमेंट लिंक भी शामिल हैं, और दिन के आख़िर की साफ़-सुथरी रिपोर्ट।
  • रिकॉर्ड, जिन्हें मरीज़ के ABHA से जोड़ा जा सकता है, अगर उनके पास ABHA है।

इसे अपने क्लिनिक के कामकाज के तरीके पर देखने के लिए, डेमो बुक करें।

आम सवाल

क्या क्लिनिकल तस्वीरें लेने के लिए मरीज़ की सहमति ज़रूरी है?
इलाज के हिस्से के रूप में ली जाने वाली क्लिनिकल तस्वीरों के लिए दर्ज की गई सहमति लें, और किसी भी दूसरे इस्तेमाल, जैसे पढ़ाने, प्रकाशन या सोशल मीडिया के लिए, अलग से साफ़-साफ़ सहमति लें। भारत का Digital Personal Data Protection Act, 2023 मरीज़ की तस्वीर को निजी डेटा (personal data) मानता है और अपेक्षा करता है कि सहमति अपनी मर्ज़ी से, किसी खास मकसद के लिए, पूरी जानकारी के साथ और बिना किसी शक की गुंजाइश के दी जाए, और उसे वापस लेने का एक तरीका हो।
क्या क्लिनिक 'पहले और बाद' (before-and-after) की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल सकता है?
सिर्फ़ तभी, जब मरीज़ ने उसी खास इस्तेमाल के लिए अलग से सहमति दी हो, यह जानते हुए कि तस्वीरें कहां दिखेंगी, और सिर्फ़ तब तक, जब तक वह सहमति बनी रहे। जहां हो सके, पहचान बताने वाले हिस्से क्रॉप करके हटा दें, और मेडिकल रिकॉर्ड के लिए ली गई तस्वीर को दोबारा पूछे बिना कभी किसी और काम में इस्तेमाल न करें।
क्या क्लिनिकल तस्वीरें WhatsApp पर शेयर करना ठीक है?
ऐसा आम तौर पर होता है, और यही कमज़ोर कड़ी है। स्टाफ़ के किसी सदस्य के फ़ोन में या किसी चैट ग्रुप में पड़ी तस्वीर मरीज़ के रिकॉर्ड से बाहर होती है, वह फ़ोन जहां बैकअप होता है वहीं उसका भी बैकअप हो जाता है, और स्टाफ़ के उस सदस्य के नौकरी छोड़ने पर भी वह उसी फ़ोन में रह जाती है।
डर्मेटोलॉजी की ऐसी तस्वीरें कैसे लें जिनकी अलग-अलग विज़िट के बीच तुलना हो सके?
हर विज़िट में वही दूरी, वही रोशनी, वही बैकग्राउंड और तय किए गए स्टैंडर्ड व्यू (कोण) इस्तेमाल करें, क्लोज़-अप तस्वीरों में फ़्रेम के अंदर एक रूलर या कलर कार्ड रखें, और हर तस्वीर के साथ शरीर का हिस्सा दर्ज करें।
बच्चे की तस्वीरों के लिए सहमति कौन दे सकता है?
माता-पिता या कानूनी अभिभावक। Digital Personal Data Protection Act, 2023 के तहत 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के निजी डेटा के लिए माता-पिता या अभिभावक की ऐसी सहमति ज़रूरी है जिसकी पुष्टि की जा सके (verifiable consent)। बच्चे को भी तस्वीरों के बारे में उसकी समझ में आने वाले शब्दों में बताएं।

यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।