क्लिनिक अनुपालन

भारत में मरीज़ों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखना: काग़ज़ी और डिजिटल रिकॉर्ड के नियम

भारत में क्लिनिकों को मेडिकल रिकॉर्ड कितने समय तक रखने होते हैं, NABH क्या अपेक्षा करता है, काग़ज़ी फ़ाइलें कैसे रखें, और क्लाउड में रखे रिकॉर्ड के लिए DPDP एक्ट का क्या मतलब है।

यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।

हर क्लिनिक रिकॉर्ड रखता है, और देर-सबेर हर क्लिनिक मालिक वही तीन सवाल पूछता है। हमें इन्हें कितने समय तक रखना है? इन्हें कहां रखा जाना चाहिए? और इन्हें देखने की इजाज़त किसे है?

भारत में इनके जवाब कई जगह बिखरे हुए हैं: चिकित्सा आचार संहिता, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (Clinical Establishments) नियम, आईटी एक्ट, नया डेटा संरक्षण क़ानून, CERT-In के निर्देश और NABH के प्रत्यायन (accreditation) मानक। यह लेख काग़ज़ी फ़ाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड, दोनों के लिए इन्हें एक जगह लाता है, और बताता है कि 92health डिजिटल पक्ष को कैसे संभालता है। यह अक्टूबर 2026 तक की स्थिति का सारांश है, क़ानूनी सलाह नहीं। नियम राज्य-दर-राज्य अलग होते हैं, इसलिए जो भी बात अहम हो, उसे अपने क़ानूनी सलाहकार से ज़रूर जांच लें।

संक्षेप में

  • भर्ती मरीज़ों (इन-पेशेंट) के रिकॉर्ड कम से कम तीन साल तक रखें, और व्यवहार में इससे कहीं ज़्यादा। हर तरह के रिकॉर्ड के लिए रखने की अवधि लिखित रूप में तय करें।
  • सही तरीके से अनुरोध मिलने पर 72 घंटों के भीतर मरीज़ को उसके रिकॉर्ड की कॉपी दे सकने की स्थिति में रहें।
  • काग़ज़ी फ़ाइलें एक ही सुरक्षित, सूखी और सीमित पहुंच वाली जगह पर रखें, और एक रजिस्टर रखें कि कौन-सी फ़ाइल कौन, कब ले गया।
  • डिजिटल रिकॉर्ड को संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा (sensitive personal data) मानें: एन्क्रिप्ट किया हुआ, ऐक्सेस पर नियंत्रण वाला, लॉग किया हुआ और बैकअप लिया हुआ।
  • एक डेटा उल्लंघन योजना (breach plan) तैयार रखें। कुछ घटनाओं की सूचना छह घंटों के भीतर CERT-In को देनी होती है।
  • अगर आपके पास NABH प्रत्यायन है या आप उसकी तैयारी कर रहे हैं, तो मानकर चलें कि आपकी रिकॉर्ड नीतियों और उनके पालन का ऑडिट होगा।

रिकॉर्ड कितने समय तक रखने होते हैं

शुरुआत होती है भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 (Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations) से, यानी वह चिकित्सा आचार संहिता (Code of Medical Ethics) जिसे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission) अब भी प्रकाशित करता है। यह हर डॉक्टर से अपेक्षा करती है कि वह भर्ती मरीज़ों के रिकॉर्ड एक मानक प्रारूप में इलाज शुरू होने की तारीख से तीन साल तक रखे। इसमें यह भी कहा गया है कि जब मरीज़, उसका अधिकृत परिचारक या कोई क़ानूनी प्राधिकारी रिकॉर्ड मांगे, तो उन्हें 72 घंटों के भीतर दिया जाना चाहिए।

तीन साल न्यूनतम सीमा है, सिफ़ारिश नहीं। ज़्यादातर अस्पताल और कई क्लिनिक अच्छे कारणों से रिकॉर्ड इससे कहीं ज़्यादा समय तक रखते हैं:

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act) के तहत शिकायत वाद-कारण (cause of action) पैदा होने के दो साल के भीतर दायर की जा सकती है, और अगर आयोग इस बात से संतुष्ट हो कि देरी का पर्याप्त कारण था, तो वह बाद में दायर शिकायत भी स्वीकार कर सकता है।
  • मेडिको-लीगल मामलों (चोट, ज़हर, मारपीट, दुर्घटना) में रिकॉर्ड की ज़रूरत सालों बाद पड़ सकती है, और इन्हें आम तौर पर तब तक रखा जाता है जब तक कोई भी कार्यवाही पूरी न हो जाए।
  • बच्चों के रिकॉर्ड उनके बड़े होने के बाद भी अहम रहते हैं।
  • कुछ राज्य अपने क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट नियमों के ज़रिये अपनी अलग शर्तें तय करते हैं।

व्यावहारिक जवाब है एक लिखित रिटेंशन शेड्यूल (retention schedule, यानी रिकॉर्ड रखने की अवधि की सूची): आउट-पेशेंट रिकॉर्ड, भर्ती मरीज़ों के रिकॉर्ड, मेडिको-लीगल रिकॉर्ड, इमेजिंग, सहमति पत्र (consent forms) और बिलिंग, हर एक के लिए एक अवधि, और इसे लागू करने के लिए एक नामित ज़िम्मेदार व्यक्ति।

काग़ज़ी रिकॉर्ड: मेडिकल रिकॉर्ड रूम

भारत में ज़्यादातर क्लिनिकों के पास आज भी कई सालों के काग़ज़ी रिकॉर्ड हैं। काग़ज़ अपने आप में असुरक्षित नहीं है, लेकिन उसके लिए एक व्यवस्था चाहिए।

  • एक ही जगह। एक मेडिकल रिकॉर्ड रूम या ताले वाली अलमारी, न कि कंसल्टिंग रूम और रिसेप्शन डेस्क पर पड़ी फ़ाइलें।
  • सीमित पहुंच। सिर्फ़ नामित कर्मचारी ही उसमें जा सकें या उसे खोल सकें।
  • फ़ाइल रजिस्टर। कमरे से बाहर जाने वाली हर फ़ाइल तारीख, ले जाने वाले व्यक्ति और कारण के साथ रजिस्टर में दर्ज की जाती है, और लौटने पर उसकी वापसी दर्ज की जाती है। शेल्फ़ में फ़ाइल की जगह पर रखे ट्रेसर कार्ड (tracer cards) से गुम फ़ाइल तुरंत पकड़ में आ जाती है।
  • हर मरीज़ की एक फ़ाइल, जो नाम के बजाय मरीज़ की ID या MRN के हिसाब से रखी जाती है, ताकि एक ही नाम वाले दो लोगों की फ़ाइलें कभी आपस में न मिलें।
  • प्राकृतिक नुक़सान से बचाव। फ़ाइलें फ़र्श से ऊपर, पानी की पाइपों से दूर, सूखी जगह पर और कीड़ों से सुरक्षित रखी जाती हैं, और काग़ज़ के भंडारण के अनुकूल आग से बचाव के इंतज़ाम होते हैं।
  • तय समय पर नष्ट करना। जब किसी रिकॉर्ड की रखने की अवधि पूरी हो जाती है, तो उसे श्रेड किया जाता है (shredding) या जलाया जाता है, आम कचरे के साथ कभी नहीं फेंका जाता, और नष्ट करने का ब्योरा एक रजिस्टर में दर्ज होता है: क्या नष्ट किया गया, कब, कैसे और किसने।

पुरानी फ़ाइलों को स्कैन करना उन्हें काम लायक बनाने का अच्छा तरीका है, लेकिन इसकी योजना बनाएं। एक समान मानक पर स्कैन करें, स्कैन की जांच करें, हर स्कैन को सही मरीज़ से जोड़ें, और अपनी रिटेंशन नीति में तय करें कि मूल काग़ज़ी फ़ाइल कब नष्ट की जा सकती है, या कभी नहीं। अधिनियम में मांगे गए प्रमाणपत्र के साथ पेश किए जाने पर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam) के तहत सबूत के तौर पर मान्य हैं। इस अधिनियम ने इंडियन एविडेंस एक्ट (Indian Evidence Act) की जगह ली है।

NABH क्या अपेक्षा करता है

NABH के अस्पतालों के लिए प्रत्यायन मानकों (Accreditation Standards for Hospitals) में (इनका 6ठा संस्करण 2025 में प्रकाशित हुआ) सूचना प्रबंधन (Information Management) पर एक पूरा अध्याय है। इसमें शामिल हैं:

  • रिकॉर्ड की गोपनीयता, अखंडता (integrity) और सुरक्षा;
  • पूरा और सही दस्तावेज़ीकरण, जिसमें हर प्रविष्टि से पता चल सके कि उसे किसने लिखा;
  • गुणवत्ता आश्वासन (quality assurance) के हिस्से के रूप में काग़ज़ी और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों तरह के मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा;
  • रिकॉर्ड कौन देख सकता है, रिकॉर्ड कितने समय तक रखे जाते हैं और उन्हें कैसे नष्ट किया जाता है, इस पर लिखित नीतियां;
  • ऐसे रिकॉर्ड जो मरीज़ का इलाज कर रहे लोगों को ज़रूरत के समय उपलब्ध हों।

NABH अस्पतालों के लिए डिजिटल हेल्थ स्टैंडर्ड्स (Digital Health Standards) भी चलाता है। यह डिजिटल परिपक्वता का एक अलग प्रमाणन है, जिसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन वाले अध्यायों में साइबर सुरक्षा और आईटी रेज़िलियंस (resilience) शामिल हैं, और जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के अनुरूप है। 2024 में NABH ने अस्पताल सूचना सॉफ़्टवेयर और ख़ुद EMR सॉफ़्टवेयर के लिए भी मानकों का मसौदा प्रकाशित किया।

इन मानकों का इस्तेमाल करने के लिए आपका प्रत्यायित होना ज़रूरी नहीं है। जो भी क्लिनिक अपने रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना चाहता है, उसके लिए ये एक व्यावहारिक चेकलिस्ट हैं।

डिजिटल रिकॉर्ड: क़ानून क्या कहता है

रिकॉर्ड डिजिटल होते ही कई क़ानून और नियम लागू हो जाते हैं।

क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट नियम। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 (Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act) को अपनाया है, वहां 2012 के केंद्र सरकार के नियमों का नियम 9 (Rule 9) क्लिनिकल प्रतिष्ठानों से अपेक्षा करता है कि वे, सरकार जैसा तय करे, हर मरीज़ के इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल या हेल्थ रिकॉर्ड रखें।

भारत के लिए EHR मानक। स्वास्थ्य मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड स्टैंडर्ड्स, 2016 (Electronic Health Record Standards) बताते हैं कि स्वास्थ्य रिकॉर्ड कैसे दर्ज, संग्रहित और साझा किए जाने चाहिए। सुरक्षा के लिए ये अंतरराष्ट्रीय मानकों का हवाला देते हैं, जिनमें स्वास्थ्य क्षेत्र में सूचना सुरक्षा के लिए ISO 27799, ऐक्सेस कंट्रोल के लिए ISO 22600 और ऑडिट ट्रेल (audit trails) के लिए ISO 27789 शामिल हैं।

आईटी एक्ट। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act) और संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा पर इसके 2011 के नियमों के तहत, मेडिकल रिकॉर्ड संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा हैं। ये नियम उचित सुरक्षा उपायों की मांग करते हैं और ISO/IEC 27001 को ऐसे एक मानक के रूप में नामित करते हैं जो इन्हें पूरा करता है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act)। इसके नियम नवंबर 2025 में अधिसूचित हुए और चरणों में लागू हो रहे हैं; सुरक्षा और डेटा उल्लंघन से जुड़े दायित्व मई 2027 से लागू होंगे। ये एन्क्रिप्शन, ऐक्सेस कंट्रोल, लॉगिंग और बैकअप जैसे उचित सुरक्षा उपायों की मांग करते हैं, और डेटा उल्लंघन होने पर क्लिनिक से अपेक्षा करते हैं कि वह प्रभावित लोगों और डेटा संरक्षण बोर्ड (Data Protection Board) को सूचित करे, और 72 घंटों के भीतर बोर्ड को विस्तृत रिपोर्ट दे। उचित सुरक्षा उपाय न करने पर ₹250 करोड़ तक का जुर्माना लग सकता है।

CERT-In के निर्देश। जून 2022 से, निर्दिष्ट साइबर घटनाओं की सूचना, उन पर ध्यान जाने के छह घंटों के भीतर CERT-In को देनी होती है, और आईटी सिस्टम के लॉग 180 दिनों तक भारत के भीतर रखने होते हैं।

ABDM। मरीज़ के ABHA से जुड़े रिकॉर्ड राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) की स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन नीति के तहत सिर्फ़ मरीज़ की सहमति (consent) से साझा किए जाते हैं। ABDM से जुड़ने वाले सॉफ़्टवेयर को चालू होने से पहले ABDM का अपना प्रमाणन पास करना होता है।

क्या क्लाउड की अनुमति है?

हां। कोई भी भारतीय क़ानून मरीज़ों के रिकॉर्ड क्लाउड में रखने से मना नहीं करता, और ज़्यादातर क्लिनिकों के लिए अच्छी तरह चलाई जाने वाली क्लाउड सेवा पीछे के कमरे में रखे सर्वर या रिसेप्शन के कंप्यूटर पर पड़े फ़ोल्डर से ज़्यादा सुरक्षित है। क़ानून को इस बात की परवाह है कि रिकॉर्ड सुरक्षित हैं या नहीं, इसकी नहीं कि कंप्यूटर कहां है।

सॉफ़्टवेयर चुनते समय विक्रेता से पूछें:

  1. क्या रिकॉर्ड भेजे जाते समय (in transit) और रखे रहने के दौरान (at rest) एन्क्रिप्टेड रहते हैं?
  2. क्या ऐक्सेस को भूमिका (role) के हिसाब से नियंत्रित किया जा सकता है, ताकि रिसेप्शन को उतना ही दिखे जितना रिसेप्शन को चाहिए, उससे ज़्यादा नहीं?
  3. क्या हर ऐक्सेस लॉग होता है, और क्या मुझे वह लॉग देखने को मिल सकता है?
  4. जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, तो क्या उसका ऐक्सेस तुरंत ख़त्म हो जाता है?
  5. क्या किसी रिकॉर्ड को बिना किसी निशान के बदला या हटाया जा सकता है, या सुधार दर्ज किए जाते हैं?
  6. फ़ाइलें कैसे साझा होती हैं: स्थायी सार्वजनिक लिंक से, या ऐसे लिंक से जिनकी मियाद ख़त्म हो जाती है?
  7. डेटा कहां रखा जाता है? क्या वह भारत में ही रहता है?
  8. बैकअप की क्या व्यवस्था है, और अगर मैं आपकी सेवा छोड़ दूं तो मेरे डेटा का क्या होगा?
  9. विक्रेता की डेटा उल्लंघन योजना क्या है, और आपको कितनी जल्दी बताया जाएगा?

92health रिकॉर्ड कैसे रखता है

92health एक EMR है, जिसका इस्तेमाल भारत में क्लिनिक, अस्पताल, फ़ार्मेसी, लैब और ऑप्टिकल शॉप करते हैं। ऊपर बताई गई बातों को यह इस तरह संभालता है।

डेटा कहां रहता है। 92health, Google Cloud पर चलता है, और मरीज़ों का डेटा भारत में ही रहता है। स्कैन, रिपोर्ट, फ़ोटो और विज़िट समरी Google Cloud Storage में, निजी (private) स्टोरेज में रखे जाते हैं, जो क्लिनिक के लोगो और वेबसाइट की तस्वीरों जैसी चीज़ों के लिए इस्तेमाल होने वाले सार्वजनिक स्टोरेज से अलग रखा गया है। Google Cloud रखे गए डेटा को डिफ़ॉल्ट रूप से एन्क्रिप्ट करता है, और 92health से हर कनेक्शन HTTPS पर होता है।

फ़ाइलें कैसे खुलती हैं। कोई भी फ़ाइल किसी स्थायी सार्वजनिक पते पर उपलब्ध नहीं होती। वह एक ऐसे लिंक से खुलती है जिसकी मियाद पांच मिनट में ख़त्म हो जाती है, या सिर्फ़ साइन-इन किए हुए किसी स्टाफ़ सदस्य को ही स्ट्रीम की जाती है।

कौन क्या देख सकता है। ऐक्सेस भूमिका के हिसाब से और रिकॉर्ड के प्रकार के हिसाब से तय होता है: क्लिनिकल नोट्स, प्रिस्क्रिप्शन, मरीज़ के दस्तावेज़, बिलिंग वग़ैरह, हर एक के लिए कोई ऐक्सेस नहीं, सिर्फ़ पढ़ने का या लिखने का। जब तक क्लिनिक ख़ुद तय न करे, रिसेप्शन को वह नहीं दिखता जो डॉक्टर को दिखता है। जब किसी स्टाफ़ सदस्य को हटाया जाता है या उसका खाता बंद किया जाता है, तो उसकी भूमिका चाहे जो कहे, उसका ऐक्सेस तुरंत ख़त्म हो जाता है।

क्या लॉग होता है। किसी संगठन द्वारा मरीज़ के डेटा तक पहुंच लॉग की जाती है। स्टाफ़ के ऐक्सेस में बदलाव, जैसे भूमिका बदलना या खाता बंद करना, इतिहास के रूप में रखे जाते हैं, और अस्वीकार किए गए साइन-इन भी दर्ज होते हैं।

साइन-इन। पासवर्ड सिर्फ़ bcrypt हैश के रूप में रखे जाते हैं, 90 दिनों में एक्सपायर हो जाते हैं, और हाल के पासवर्ड दोबारा इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। SMS से टू-फ़ैक्टर साइन-इन उपलब्ध है, और एक सेशन एक दिन चलता है।

पहचान संख्याएं। आधार नंबर की जांच की जाती है, उसे सिर्फ़ एकतरफ़ा हैश के रूप में रखा जाता है, और जवाबों (responses) और लॉग में छिपाया (मास्क किया) जाता है।

कुछ भी चुपचाप दोबारा नहीं लिखा जाता। जारी किया गया प्रिस्क्रिप्शन बदला नहीं जा सकता; उसमें संशोधन एक अलग, दर्ज होने वाली प्रक्रिया है। विज़िट समरी वैसी ही रखी जाती है जैसी मरीज़ को दी गई थी। ग़लती से दर्ज किया गया निदान हटाया नहीं जाता, बल्कि एक कारण के साथ रद्द किया जाता है। किसी पुराने काग़ज़ी कार्ड से दर्ज की गई विज़िट पर बाद में दर्ज का निशान लगाया जाता है, साथ में यह भी कि उसे किसने और कब दर्ज किया।

सहमति। मरीज़ का अपना 92health रिकॉर्ड किसी क्लिनिक के साथ सिर्फ़ उसकी सहमति से साझा होता है, और रिकॉर्ड मरीज़ के ABHA से जोड़े जा सकते हैं, वह भी सहमति से।

छोटी बातें जो मायने रखती हैं। डॉक्टर के Google Calendar से सिंक होने वाले अपॉइंटमेंट में मरीज़ की ID और विज़िट का प्रकार होता है, मरीज़ का नाम कभी नहीं।

आपके क्लिनिक के लिए चेकलिस्ट

  1. हर तरह के रिकॉर्ड के लिए एक रिटेंशन शेड्यूल लिखें, और तय करें कि इसे कौन लागू करेगा।
  2. काग़ज़ी रिकॉर्ड फ़ाइल रजिस्टर के साथ एक सुरक्षित कमरे में रखें, और जिन रिकॉर्ड की अवधि पूरी हो गई है, उन्हें ऐसे तरीके से नष्ट करें जो दर्ज हो।
  3. पक्का करें कि आप 72 घंटों के भीतर मरीज़ को उसके रिकॉर्ड की कॉपी दे सकें।
  4. हर स्टाफ़ सदस्य को उसका अपना लॉगिन दें, कभी साझा लॉगिन नहीं, और ऐक्सेस उसकी भूमिका के अनुसार हो।
  5. जिस दिन कोई नौकरी छोड़े, उसी दिन उसका ऐक्सेस हटा दें।
  6. किसने क्या खोला, इसका लॉग रखें, और उसे देखते भी रहें।
  7. एक डेटा उल्लंघन योजना रखें: फ़ैसला कौन करेगा, छह घंटों के भीतर CERT-In को कौन सूचित करेगा, और मरीज़ों को कौन बताएगा।
  8. अपने सॉफ़्टवेयर विक्रेता से ऊपर दिए गए सवाल पूछें, और उनके जवाब संभालकर रखें।

अगर आप देखना चाहते हैं कि 92health आपके क्लिनिक के रिकॉर्ड कैसे संभालता है, तो डेमो बुक करें।

आम सवाल

भारत में किसी क्लिनिक को मेडिकल रिकॉर्ड कितने समय तक रखने होते हैं?
चिकित्सा आचार संहिता विनियम, 2002 (Code of Medical Ethics Regulations) डॉक्टरों से अपेक्षा करते हैं कि वे भर्ती मरीज़ों (इन-पेशेंट) के रिकॉर्ड इलाज शुरू होने की तारीख से तीन साल तक रखें। ज़्यादातर क्लिनिक और अस्पताल रिकॉर्ड इससे कहीं ज़्यादा समय तक रखते हैं, क्योंकि उपभोक्ता शिकायतें और मेडिको-लीगल मामले बाद में भी उठ सकते हैं। हर तरह के रिकॉर्ड को कितने समय तक रखना है, यह लिखित रूप में तय करें।
क्या भारत में मरीज़ों के रिकॉर्ड क्लाउड में रखे जा सकते हैं?
हां। कोई भी भारतीय क़ानून इसकी मनाही नहीं करता। क़ानून उचित सुरक्षा की मांग करता है: एन्क्रिप्शन (encryption), ऐक्सेस पर नियंत्रण, लॉग, बैकअप और डेटा उल्लंघन (breach) की स्थिति के लिए एक योजना। रिकॉर्ड वहां ले जाने से पहले जांच लें कि आपका सॉफ़्टवेयर विक्रेता इनमें से हर बात पर क्या करता है, और डेटा कहां रखा जाता है।
क्लिनिक को मरीज़ को उसके रिकॉर्ड की कॉपी कितनी जल्दी देनी चाहिए?
चिकित्सा आचार संहिता विनियम, 2002 (Code of Medical Ethics Regulations) के अनुसार, मरीज़, उसके अधिकृत परिचारक या किसी क़ानूनी प्राधिकारी द्वारा मांगे गए रिकॉर्ड 72 घंटों के भीतर दिए जाने चाहिए।
मेडिकल रिकॉर्ड के लिए NABH की क्या शर्तें हैं?
NABH के अस्पताल मानकों में सूचना प्रबंधन (information management) पर एक अध्याय है, जिसमें रिकॉर्ड की गोपनीयता, अखंडता (integrity) और सुरक्षा, पूरा और सही दस्तावेज़ीकरण, रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा, और इस बारे में नीतियां शामिल हैं कि उन्हें कौन देख सकता है और कितने समय तक रखा जाता है।
डेटा उल्लंघन (data breach) के बाद क्लिनिक को क्या करना चाहिए?
CERT-In के निर्देशों के तहत, निर्दिष्ट साइबर घटनाओं की सूचना उन पर ध्यान जाने के छह घंटों के भीतर CERT-In को देनी होती है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 (Digital Personal Data Protection Rules) के तहत, मई 2027 में ये दायित्व लागू होने के बाद, प्रभावित लोगों और डेटा संरक्षण बोर्ड (Data Protection Board) को भी सूचित करना होगा, और 72 घंटों के भीतर बोर्ड को विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी।

यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।