भारत में वास्तविक दुनिया के साक्ष्य: यह क्या है, नियम क्या हैं, और अध्ययन कैसे तैयार होते हैं
वास्तविक दुनिया का डेटा और साक्ष्य क्या हैं, मार्केटिंग के बाद के अध्ययनों और अवलोकन आधारित अध्ययनों के बारे में भारतीय नियम क्या कहते हैं, और डॉक्टरों के साथ मिलकर तैयार किया गया अध्ययन कैसे चलता है।
यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।
एक क्लिनिकल ट्रायल (clinical trial) एक सीमित सवाल का अच्छी तरह जवाब देता है: क्या इन मरीज़ों में, इन परिस्थितियों में, यह दवा विकल्प से बेहतर काम करती है? लेकिन उसके बाद डॉक्टरों, इलाज का ख़र्च उठाने वालों (payers) और दवा बनाने वालों को जो जानना होता है, उसमें से ज़्यादातर का जवाब यह नहीं दे सकता। दवा असल में कैसे इस्तेमाल होती है? किन मरीज़ों में? पांच साल में क्या नतीजे मिलते हैं? भारतीय मरीज़ों को असल में जो इलाज मिलता है, उसकी तुलना में यह कैसी है?
इन सवालों के जवाब सामान्य इलाज (routine care) से मिलते हैं। यह लेख बताता है कि वास्तविक दुनिया का डेटा और साक्ष्य क्या हैं, भारतीय नियम क्या कहते हैं, और भारत में डॉक्टरों के साथ मिलकर तैयार किया गया अध्ययन कैसे चलता है। यह मेडिकल अफ़ेयर्स (medical affairs), HEOR और क्लिनिकल डेवलपमेंट (clinical development) टीमों के लिए, और उन डॉक्टरों के लिए लिखा गया है जो इसमें भाग लेना चाहते हैं।
वास्तविक दुनिया का डेटा और वास्तविक दुनिया के साक्ष्य
सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली परिभाषाएं अमेरिका के Food and Drug Administration के 2018 के वास्तविक दुनिया के साक्ष्य से जुड़े फ़्रेमवर्क से आती हैं:
- वास्तविक दुनिया का डेटा (real-world data, RWD) है “मरीज़ की स्वास्थ्य स्थिति और/या स्वास्थ्य सेवा देने से जुड़ा डेटा, जो अलग-अलग स्रोतों से नियमित रूप से इकट्ठा किया जाता है”: इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड, क्लेम और बिलिंग डेटा, उत्पाद और बीमारी की रजिस्ट्री, मरीज़ों का खुद तैयार किया गया डेटा, और उपकरणों से मिलने वाला डेटा।
- वास्तविक दुनिया के साक्ष्य (real-world evidence, RWE) हैं “RWD के विश्लेषण से मिले, किसी चिकित्सा उत्पाद के इस्तेमाल और उसके संभावित फ़ायदों या जोखिमों के बारे में क्लिनिकल साक्ष्य।”
नियामक अब RWE का इस्तेमाल गंभीरता से करते हैं। अमेरिका में, 2016 के 21st Century Cures Act ने FDA से एक ऐसा कार्यक्रम बनाने को कहा, जिसमें नए संकेतों (new indications) और मंज़ूरी के बाद की ज़रूरतों के समर्थन में इसका इस्तेमाल हो। यूरोप में, European Medicines Agency ने 2022 में DARWIN EU बनाया, एक नेटवर्क जिसमें लगभग 40 डेटा साझेदार जुड़ चुके हैं, और हर साझेदार अपने डेटा को एक साझा फ़ॉर्मेट में बदलता है ताकि एक ही विश्लेषण सब पर चल सके।
RWE किन सवालों के जवाब दे सकता है
- इलाज के पैटर्न (treatment patterns): किसी थेरेपी को कौन पाता है, किस खुराक में, कितने समय तक, और उससे पहले और बाद में उन्हें क्या मिलता है।
- प्रभावशीलता (effectiveness): सामान्य प्रैक्टिस में कोई इलाज कैसा काम करता है, उन मरीज़ों में भी जिन्हें ट्रायल से बाहर रखा गया था।
- सुरक्षा: बड़ी और ज़्यादा विविध आबादी में, लंबे समय तक, होने वाले दुष्प्रभाव।
- बीमारी का स्वाभाविक क्रम (natural history): कोई बीमारी कैसे बढ़ती है, जो दुर्लभ और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों में सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
- बोझ और ख़र्च: किसी बीमारी से जुड़ी विज़िट, भर्ती, जांचें और ख़र्च।
- बाहरी तुलना समूह (external comparators): सामान्य इलाज पाने वाले मरीज़ों का एक अच्छी तरह परिभाषित समूह, जिसकी तुलना एकल-समूह (single-arm) अध्ययन से की जा सके।
भारतीय नियम क्या कहते हैं
New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 में “वास्तविक दुनिया के साक्ष्य” शब्द इस्तेमाल नहीं होता। लेकिन ये वह फ़र्क़ ज़रूर करते हैं जो मायने रखता है: “प्रभावकारिता” (efficacy) किसी दवा का नियंत्रित क्लिनिकल माहौल में असर है, जबकि “प्रभावशीलता” (effectiveness) उसकी “दवा की मंज़ूरी के बाद, वास्तविक क्लिनिकल स्थिति में मनचाहा असर हासिल करने की क्षमता” है।
मार्केटिंग के बाद के आकलन पर इनकी Fifth Schedule तीन रास्ते बताती है:
- Phase IV ट्रायल, जो मंज़ूर प्रोटोकॉल के तहत, क्लिनिकल ट्रायल पर लागू सुरक्षा और मुआवज़े के नियमों के साथ चलाए जाते हैं।
- मार्केटिंग के बाद निगरानी (post-marketing surveillance), अवलोकन आधारित (observational) या बिना हस्तक्षेप वाले (non-interventional) अध्ययन, जिनके प्रोटोकॉल को Central Licencing Authority की मंज़ूरी चाहिए, लेकिन जिन पर नई दवा के क्लिनिकल ट्रायल को नियंत्रित करने वाले प्रावधान लागू नहीं होते।
- समय-समय पर दी जाने वाली सुरक्षा अपडेट रिपोर्ट (periodic safety update reports, PSURs): मंज़ूरी के बाद पहले दो साल हर छह महीने में, फिर अगले दो साल हर साल।
जून 2026 में प्रकाशित एक मसौदा संशोधन में बायोलॉजिक्स सहित कुछ उत्पादों के लिए PSUR रिपोर्टिंग बढ़ाने का प्रस्ताव था। यह लेख लिखे जाने तक इसे अंतिम रूप से अधिसूचित नहीं किया गया था।
अक्टूबर 2026 तक, वास्तविक दुनिया के साक्ष्य पर CDSCO का कोई विशेष दिशानिर्देश हमारी जानकारी में नहीं है। 2022 में उद्योग के एक स्थिति पत्र (position paper) में कहा गया था कि Rules में RWE अध्ययनों को विशेष रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। इस पर भरोसा करने से पहले CDSCO से मौजूदा स्थिति की पुष्टि कर लें।
ICMR द्वारा चलाई जाने वाली Clinical Trials Registry - India (CTRI) 15 जून 2009 से क्लिनिकल ट्रायल के लिए अनिवार्य है, और पंजीकरण पहले प्रतिभागी को शामिल करने से पहले होना चाहिए। अवलोकन आधारित अध्ययनों सहित अन्य शोध के लिए ICMR पंजीकरण को स्वैच्छिक बताता है। CTRI का अपना दिशानिर्देश है “संदेह हो तो पंजीकरण करें”, और यह सलाह देता है कि पूर्वव्यापी (retrospective) अध्ययन भी डेटा इकट्ठा करना शुरू होने से पहले पंजीकरण कराएं।
ICMR’s National Ethical Guidelines for Biomedical and Health Research Involving Human Participants (2017) लगभग हर RWE अध्ययन पर लागू होते हैं:
- हर शोध प्रस्ताव एथिक्स कमेटी (ethics committee) के पास जाता है, और समीक्षा से छूट मिलेगी, समीक्षा तेज़ी से होगी या पूरी होगी, यह शोधकर्ता नहीं, कमेटी तय करती है;
- शोध के लिए बनाई गई रजिस्ट्री, या जिनका डेटा शोध में इस्तेमाल होगा, उन्हें एथिक्स कमेटी की पहले से मंज़ूरी चाहिए;
- सहमति से छूट केवल तय मामलों में दी जा सकती है, जैसे ऐसे पूर्वव्यापी अध्ययन जिनमें प्रतिभागियों की पहचान हटा दी गई हो (de-identified) या उनसे संपर्क न हो सके, या गुमनाम (anonymised) डेटा पर शोध, और वह भी तभी जब जोखिम न्यूनतम से कम हो;
- शोध में इस्तेमाल होने वाले रिकॉर्ड की निजी जानकारी कोड की जानी चाहिए या गुमनाम की जानी चाहिए, और उस तक पहुंच सीमित होनी चाहिए।
Digital Personal Data Protection Act, 2023 में शोध के लिए एक छूट है: धारा 17(2)(b) कहती है कि शोध, संग्रह (archiving) या सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए होने वाली प्रोसेसिंग पर यह Act लागू नहीं होता, जब डेटा का इस्तेमाल व्यक्ति के बारे में कोई फ़ैसला लेने के लिए न हो और प्रोसेसिंग तय मानकों का पालन करे। नवंबर 2025 में अधिसूचित DPDP Rules ये मानक तय करते हैं (वैध, उद्देश्य तक सीमित, न्यूनतम, सटीक, समय-सीमित, सुरक्षित और जवाबदेह प्रोसेसिंग)। ये Act के मुख्य दायित्वों के साथ, लगभग मई 2027 से लागू होंगे। तब तक, और उसके बाद इनके साथ भी, ज़्यादातर अध्ययनों का आधार सहमति और नैतिक मंज़ूरी ही रहेगी।
ABDM. Ayushman Bharat Digital Mission रिकॉर्ड को मरीज़ के ABHA से जोड़ता है और सहमति से उन्हें स्वास्थ्य सेवा देने वालों के बीच भेजता है। अगस्त 2026 तक सरकार ने 96.43 करोड़ ABHA नंबर और 110 करोड़ से ज़्यादा जुड़े हुए स्वास्थ्य रिकॉर्ड बताए। मसौदा Health Data Management Policy (अप्रैल 2022) शोध के लिए गुमनाम, समेकित (aggregated) डेटा साझा करने का प्रावधान करती है, जिसकी पहुंच की प्रक्रियाएं National Health Authority तय करेगी; हमें ये प्रक्रियाएं प्रकाशित हुई नहीं मिलीं।
भारत में वास्तविक दुनिया का डेटा कहां से आता है
- अस्पताल और क्लिनिक के रिकॉर्ड, जहां वे डिजिटल और व्यवस्थित (structured) हैं।
- बीमारी की रजिस्ट्री, जैसे ICMR’s National Cancer Registry Programme, और पेशेवर संस्थाओं द्वारा चलाई जाने वाली स्पेशियलिटी रजिस्ट्री।
- फ़ार्मेसी और लैब का डेटा।
- मरीज़ों द्वारा खुद बताया गया डेटा, जो सहमति से इकट्ठा किया जाता है।
चुनौती मात्रा की नहीं है, वह भारत में भरपूर है। चुनौती यह है कि सामान्य इलाज का बड़ा हिस्सा काग़ज़ पर या खुले टेक्स्ट (free text) में दर्ज होता है, रिकॉर्ड अलग-अलग सेवा देने वालों में बंटे होते हैं, और डेटा की गुणवत्ता शायद ही कभी मापी जाती है। जो अध्ययन इसे नज़रअंदाज़ करता है, वह ऐसे आंकड़े देता है जिन पर किसी को भरोसा नहीं करना चाहिए।
डॉक्टरों के साथ मिलकर तैयार किया गया अध्ययन कैसे चलता है
जिन सवालों का जवाब मौजूदा डेटा नहीं दे सकता, उनके लिए सबसे भरोसेमंद तरीक़ा है उन डॉक्टरों के साथ मिलकर, जो मरीज़ों को देखते हैं, आगे की ओर (prospectively) डेटासेट तैयार करना। हम किसी अध्ययन को इस तरह चलाते हैं:
- सवाल। एक प्रायोजक (sponsor) एक सवाल लेकर आता है: किसी बीमारी में इलाज के पैटर्न, किसी थेरेपी के नतीजे, किसी बीमारी का स्वाभाविक क्रम।
- व्यवहार्यता (feasibility)। हम आकलन करते हैं कि क्या भारत का सामान्य इलाज इसका जवाब दे सकता है: कितने मरीज़, किस तरह के केंद्रों पर, कौन सा डेटा दर्ज होता है।
- डॉक्टरों का नेटवर्क। हम उस थेरेपी क्षेत्र के विशेषज्ञों को अन्वेषक (investigators) के रूप में जोड़ते हैं, उन केंद्रों पर जहां सही मरीज़ आते हैं।
- प्रोटोकॉल और मंज़ूरियां। तय डेटा सेट और नतीजों की परिभाषाओं वाला प्रोटोकॉल, हर केंद्र पर एथिक्स कमेटी की मंज़ूरी, जहां उचित हो वहां CTRI पंजीकरण, और जहां अध्ययन मार्केटिंग के बाद के नियमों के दायरे में आता हो वहां नियामक मंज़ूरी।
- सहमति। मरीज़ों को बताया जाता है कि क्या इकट्ठा किया जा रहा है और क्यों, और उनकी सहमति दर्ज की जाती है।
- डेटा दर्ज करना। डेटा बाद में खुले टेक्स्ट से निकालने के बजाय, इलाज के दौरान ही, अध्ययन की परिभाषाओं के अनुसार व्यवस्थित फ़ील्ड में दर्ज किया जाता है।
- गुणवत्ता जांच। पूर्णता (completeness), अनुरूपता (conformance) और विश्वसनीयता (plausibility) की लगातार जांच होती है, और सवाल केंद्र तक तभी वापस भेजे जाते हैं जब मरीज़ अभी याद हो।
- विश्लेषण और रिपोर्टिंग। पहचान हटाए गए डेटा का विश्लेषण प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है, और नतीजे प्रायोजक को बताए जाते हैं और, सहमति के अनुसार, डॉक्टरों के साथ प्रकाशित किए जाते हैं।
डॉक्टरों की स्वतंत्रता और डेटा की सच्चाई, रफ़्तार से ज़्यादा मायने रखती है। जिस अध्ययन के नतीजों पर पूरा नियंत्रण प्रायोजक का हो, या जिसके डेटा का ऑडिट न हो सके, वह न किसी नियामक को, न इलाज का ख़र्च उठाने वाले को, और न किसी डॉक्टर को राज़ी कर पाएगा।
इसमें 92health की भूमिका
92health एक EMR है, जिसका इस्तेमाल भारत में क्लिनिक, अस्पताल, फ़ार्मेसी, लैब और ऑप्टिकल शॉप करते हैं। क्योंकि डॉक्टर इसमें इलाज को व्यवस्थित, कोड किए गए डेटा के रूप में दर्ज करते हैं (निदान ICD-10 में, लैब नतीजे FHIR R4 के रूप में सत्यापित, रिकॉर्ड सहमति से ABHA से जोड़े जा सकते हैं), इसलिए क्लिनिक चलाने वाले वही रिकॉर्ड, मरीज़ों की सहमति और नैतिक मंज़ूरी के साथ, शोध के सवालों का जवाब दे सकते हैं।
हम लाइफ़ साइंसेज़ टीमों के साथ मिलकर किसी थेरेपी क्षेत्र में साक्ष्य जुटाने वाले अध्ययन करवाते हैं: सवाल का दायरा तय करना, डॉक्टरों का नेटवर्क जोड़ना, और ऊपर बताए तरीक़े से अध्ययन चलाना। किसी सवाल पर बात करने के लिए कॉल बुक करें।
स्रोत
- US FDA. FDA के वास्तविक दुनिया के साक्ष्य कार्यक्रम का फ़्रेमवर्क (Framework for FDA’s Real-World Evidence Program), दिसंबर 2018।
- European Medicines Agency. DARWIN EU।
- CDSCO. New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 (समेकित पाठ, 2022 में हुए संशोधन के अनुसार)।
- Clinical Trials Registry - India और इसके अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)।
- ICMR. National Ethical Guidelines for Biomedical and Health Research Involving Human Participants, 2017।
- MeitY. Digital Personal Data Protection Act, 2023 और DPDP Rules, 2025।
- PIB. ABDM फ़ैक्टशीट, अगस्त 2026।
आम सवाल
- वास्तविक दुनिया के साक्ष्य (real-world evidence) क्या हैं?
- किसी चिकित्सा उत्पाद का इस्तेमाल कैसे होता है, और उसके फ़ायदे और जोखिम क्या हैं, इसके बारे में क्लिनिकल साक्ष्य, जो वास्तविक दुनिया के डेटा से मिलते हैं: सामान्य इलाज के दौरान इकट्ठा किए गए रिकॉर्ड, जैसे इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, क्लेम और बिलिंग डेटा, और खुद मरीज़ों से मिलने वाला डेटा। सबसे ज़्यादा उद्धृत की जाने वाली परिभाषाएं अमेरिकी FDA की हैं।
- क्या भारत में वास्तविक दुनिया के साक्ष्य के लिए नियम हैं?
- भारत के New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 में यह शब्द इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन ये प्रभावशीलता (effectiveness) को वास्तविक क्लिनिकल स्थिति में किसी दवा के असर के रूप में परिभाषित करते हैं और मार्केटिंग के बाद के रास्ते तय करते हैं: Phase IV ट्रायल, अवलोकन आधारित या मार्केटिंग के बाद निगरानी के अध्ययन, और समय-समय पर दी जाने वाली सुरक्षा अपडेट रिपोर्ट। अक्टूबर 2026 तक, वास्तविक दुनिया के साक्ष्य पर CDSCO का कोई विशेष दिशानिर्देश हमारी जानकारी में नहीं है।
- क्या अवलोकन आधारित अध्ययनों (observational studies) को CTRI में दर्ज कराना ज़रूरी है?
- क्लिनिकल ट्रायल के लिए Clinical Trials Registry - India में पंजीकरण अनिवार्य है। अवलोकन आधारित अध्ययनों सहित अन्य शोध के लिए ICMR इसे स्वैच्छिक बताता है, और CTRI की अपनी सलाह है कि संदेह होने पर, डेटा इकट्ठा करना शुरू होने से पहले पंजीकरण करा लें।
- क्या भारत में वास्तविक दुनिया के साक्ष्य वाले अध्ययनों को एथिक्स कमेटी की मंज़ूरी चाहिए?
- हां। ICMR के 2017 के राष्ट्रीय नैतिक दिशानिर्देश कहते हैं कि हर शोध प्रस्ताव एथिक्स कमेटी के पास जाना चाहिए, जो समीक्षा का स्तर तय करती है, और शोध के लिए इस्तेमाल होने वाली रजिस्ट्री को कमेटी की पहले से मंज़ूरी चाहिए।
- DPDP Act वास्तविक दुनिया के साक्ष्य वाले अध्ययनों पर कैसे असर डालता है?
- Digital Personal Data Protection Act, 2023 शोध और सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए होने वाली प्रोसेसिंग को छूट देता है, जब डेटा का इस्तेमाल व्यक्ति के बारे में फ़ैसले लेने के लिए न हो और प्रोसेसिंग Rules में तय मानकों का पालन करे। ये मानक Act के मुख्य दायित्वों के साथ, लगभग मई 2027 से लागू होंगे।
यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।